कोलकाता : नराकास, कोलकाता (कार्यालय-2) के तहत सीएसआईआर- केन्द्रीय काँच एवं सिरामिक अनुसंधान संस्थान, कोलकाता एक दिवसीय राष्ट्रीय हिंदी संगोष्ठी आयोजित की गई। इसका विषय था- ‘आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य में भारतीय भाषाओं की भूमिका’। इस कार्यक्रम में अलग-अलग सरकारी कार्यालयों के प्रतिनिधि और देशभर से राजभाषा से जुड़े कर्मचारी ऑनलाइन भी शामिल हुए।
कार्यक्रम की शुरुआत स्वागत भाषण से हुई। संस्थान के प्रशासन नियंत्रक सुप्रकाश हलदर ने कहा कि ऐसे आयोजन से लोगों को भारतीय भाषाओं में काम करने की प्रेरणा मिलेगी। इसके बाद नराकास अध्यक्ष प्रोफेसर बिक्रमजीत बसु ने अपने संबोधन में कहा कि जर्मनी, फ्रांस, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश अपनी भाषा में काम करके आगे बढ़े हैं इसलिए हमें भी हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं का ज्यादा इस्तेमाल करना चाहिए।
इस संगोष्ठी को चार सत्रों में बांटा गया था। पहले सत्र में आईआईटी खड़गपुर के डॉ. राजीव कुमार रावत ने आधुनिक तकनीक और ई-टूल्स के उपयोग के बारे में जानकारी दी। दूसरे सत्र में राजभाषा विभाग, भारत सरकार के डॉ. विचित्रसेन गुप्त ने सरकारी दफ्तरों में हिंदी के बेहतर इस्तेमाल पर बात की और सभी को देश के विकास में योगदान देने के लिए प्रेरित किया।
दोपहर के बाद तीसरे सत्र में कोलकाता विश्वविद्यालय की प्रोफेसर राजश्री शुक्ला ने नई शिक्षा नीति में मातृभाषा के महत्व को समझाया। चौथे और अंतिम सत्र में यूको बैंक के सत्येंद्र कुमार शर्मा ने बताया कि तकनीक के जरिए हिंदी के काम को कैसे आसान बनाया जा सकता है।
सभी सत्रों की अध्यक्षता अलग-अलग विशेषज्ञों ने की। कार्यक्रम का संचालन संजीव कुमार सिंह ने किया और अंत में मुनमुन गुप्ता ने धन्यवाद दिया। आयोजन में कई अन्य अधिकारियों का भी सहयोग रहा।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। इसके बाद सीजीसीआरआई स्टाफ क्लब की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया गया।