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मतदाता सूची विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख, बिना जांच कोई नया दस्तावेज स्वीकार नहीं होगा

नामांकन से पहले सभी गड़बड़ियां दूर करने का निर्देश, अपीलीय ट्राइब्यूनल को तुरंत काम शुरू करने को कहा।

By श्वेता सिंह

Apr 01, 2026 15:52 IST

नयी दिल्लीः पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of India) ने मतदाता सूची और नामांकन प्रक्रिया को लेकर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने साफ कहा है कि किसी भी नए दस्तावेज को उसकी सही जांच किए बिना स्वीकार नहीं किया जाएगा। अदालत का यह फैसला चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए रखने के उद्देश्य से बेहद अहम माना जा रहा है।

सुनवाई के दौरान उठे अहम मुद्दे

बुधवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत (Surya Kant), न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची (Joymalya Bagchi) और न्यायमूर्ति बिपुल एम पंचोली (Bipul M Pancholi) की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की।

सुनवाई की शुरुआत में ही अदालत को बताया गया कि अपीलीय ट्राइब्यूनल (Appellate Tribunal) ने अभी तक काम शुरू नहीं किया है, जबकि नामांकन की आखिरी तारीख बेहद नजदीक है। इस पर अदालत ने तुरंत सख्ती दिखाते हुए निर्देश दिया कि ट्राइब्यूनल आधे घंटे के भीतर काम शुरू करे।

नामांकन से पहले गड़बड़ियां ठीक करने का आदेश

अदालत ने उन 152 सीटों पर विशेष ध्यान देने को कहा, जहां 23 अप्रैल को पहले चरण में मतदान होना है। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि नामांकन की अंतिम तिथि 6 अप्रैल से पहले सभी तकनीकी और तथ्यात्मक गड़बड़ियों को ठीक किया जाए।

इसका मतलब है कि उम्मीदवारों और मतदाताओं से जुड़े किसी भी तरह के विवाद को समय रहते सुलझाना जरूरी होगा, ताकि चुनाव प्रक्रिया में कोई बाधा न आए। सुनवाई के दौरान फरक्का सीट से कांग्रेस उम्मीदवार मोहताब शेख के वकील ने बताया कि उनके मुवक्किल का नाम मतदाता सूची में नहीं है, जबकि वे चुनाव लड़ रहे हैं।

इस पर अदालत ने स्पष्ट किया कि अगर किसी उम्मीदवार या मतदाता का नाम सूची से हट गया है, तो वे अलग से आवेदन कर सकते हैं। जरूरत पड़ने पर नए दस्तावेज भी जमा किए जा सकते हैं, लेकिन उनकी पूरी जांच के बाद ही उन्हें मान्यता दी जाएगी।

हाईकोर्ट की प्रगति पर संतोष

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कलकत्ता हाईकोर्ट (Calcutta High Court) के मुख्य न्यायाधीश की रिपोर्ट का जिक्र किया। रिपोर्ट के मुताबिक अब तक करीब 47 लाख मामलों का निपटारा किया जा चुका है। हर दिन औसतन 1 लाख 75 हजार से 2 लाख मामलों की जांच हो रही है। उम्मीद जताई गई है कि 7 अप्रैल तक सभी मामलों की जांच पूरी हो जाएगी।

ट्राइब्यूनल को मजबूत करने के निर्देश

अदालत ने यह भी कहा कि अपीलीय ट्राइब्यूनल को सही तरीके से काम करने के लिए सभी जरूरी सुविधाएं दी जाएं। इसमें सदस्यों के लिए मानदेय, यात्रा और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि अगर ट्राइब्यूनल के पास पर्याप्त संसाधन होंगे, तो वह तेजी और निष्पक्षता से काम कर पाएगा।

न्यायिक अधिकारियों पर दबाव न डालने की चेतावनी

न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची (Joymalya Bagchi) ने साफ कहा कि न्यायिक अधिकारियों पर किसी भी तरह का दबाव डालने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए। अदालत ने जोर देकर कहा कि ट्राइब्यूनल के सदस्य स्वतंत्र रूप से काम कर सकें, यह सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया पूरी तरह वैध और पारदर्शी होनी चाहिए। बिना किसी ठोस और सही कारण के किसी भी व्यक्ति के वोट देने के अधिकार को नहीं छीना जा सकता। अगर किसी का नाम सूची से हटाया जाता है, तो उसके पीछे स्पष्ट कारण बताना जरूरी होगा।

चुनाव से ठीक पहले सुप्रीम कोर्ट का यह हस्तक्षेप पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे उम्मीदवारों के साथ-साथ आम मतदाताओं के अधिकारों की भी बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

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