कानपुरः MBA की पढ़ाई के लिए पैसे जुटाने में असफल रहने पर एक छात्र ने अपनी किडनी बेचने का फैसला किया, लेकिन इसके बाद भी वह ठगी का शिकार हो गया। तय सौदा 9 लाख रुपये का था, पर छात्र का आरोप है कि उसके बैंक खाते में केवल साढ़े 3 लाख रुपये ही जमा किए गए। उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए अनुरोध किया है कि उसे पूरी राशि दिलाने की व्यवस्था की जाए।
पुलिस के अनुसार आयुष कुमार बिहार के समस्तीपुर के रहने वाले हैं और देहरादून के एक प्रतिष्ठित कॉलेज में MBA कर रहे हैं। चौथे सेमेस्टर की फीस भरने के लिए वे आर्थिक रूप से संघर्ष कर रहे थे। उन्होंने कई लोगों से उधार मांगा मगर किसी ने उनकी मदद नहीं की।
कानपुर पश्चिम ज़ोन के डीसीपी काशिम आबिदी ने बताया कि आयुष के परिवार में उनकी मां, एक छोटा भाई और एक बहन हैं। उनके पिता ने कुछ साल पहले आत्महत्या कर ली थी। ऐसे में कॉलेज फीस की चिंता ने आयुष को बेहद तनाव में डाल दिया था। इसी दौरान उनका संपर्क किडनी खरीद-फरोख्त करने वाले एक गिरोह से हुआ। गिरोह के कहने पर उन्होंने सोशल मीडिया पर किडनी डोनर से जुड़े एक ग्रुप को जॉइन किया।
छात्र ने पुलिस को बताया कि उसी ग्रुप के जरिए उनकी मुलाकात डॉक्टर अफजल और डॉक्टर वैभव से हुई, जिन्होंने उन्हें कानपुर बुलाया। वहां कुछ बिचौलियों के साथ उनका समझौता हुआ। शुरुआत में उन्हें किडनी के बदले 9 लाख रुपये देने की बात कही गई, लेकिन बाद में रकम घटाकर 6 लाख रुपये कर दी गई।
आयुष ने कानपुर के एक अस्पताल में अपनी किडनी बेची। ऑपरेशन के बाद जब उन्होंने अपना बैंक खाता देखा तो उसमें केवल साढ़े 3 लाख रुपये ही जमा थे। इसके बाद उन्होंने पुलिस से शिकायत की।
कानपुर पुलिस के असिस्टेंट कमिश्नर आशुतोष कुमार ने बताया कि जांच में सामने आया है कि लखनऊ और नोएडा के कुछ अस्पताल इस किडनी तस्करी गिरोह से जुड़े हुए हैं। इस मामले में कई लोगों की पहचान की गई है। पुलिस ने डॉक्टर प्रीति आहूजा समेत चार अन्य डॉक्टरों और एक बिचौलिए को गिरफ्तार किया है।