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Bengal Election: बंगाल में फार्म-6 विवाद: अभिषेक बनर्जी का हमलावर रुख, ममता बनर्जी का चुनाव आयोग को पत्र

फार्म–6 के जरिए बाहरी मतदाताओं को जोड़ने का आरोप, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के उल्लंघन की चेतावनी।

By श्वेता सिंह

Apr 01, 2026 12:41 IST

कोलकाताः पश्चिम बंगाल में अब फार्म–6 को लेकर सियासी बवाल तेज हो गया है। तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और लोकसभा में पार्टी के नेता अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि भाजपा बाहरी राज्यों से करीब 800 लोगों के नाम फार्म–6 के जरिए मतदाता सूची में जोड़ने की कोशिश कर रही है। उनका कहना है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह से नियमों के खिलाफ है और इसका उद्देश्य बंगाल में वोटर लिस्ट में गड़बड़ी करना है।

अभिषेक बनर्जी ने कहा कि उन्होंने सोमवार को ही स्थिति का पता लगाया और सीईओ कार्यालय में यह कार्रवाई “हाथों-हाथ पकड़ी” गयी। उन्होंने दावा किया कि मंगलवार को भी लगभग 800 बाहरी मतदाताओं के नाम जोड़ने की कोशिश की गई, जिसमें बिहार के लोग शामिल थे। उनका आरोप है कि भाजपा पूरे राज्य में समान रूप से बाहरी मतदाताओं को जोड़कर चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है।

ममता बनर्जी का चुनाव आयोग को पत्र

तृणमूल सुप्रीमो और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस मामले पर सख्त रुख अपनाया। उन्होंने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर स्पष्ट किया कि फार्म-6 के जरिए बाहरी लोगों के नाम मतदाता सूची में जोड़ना सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के खिलाफ है। ममता बनर्जी का कहना है कि केवल एरजुडिकेटिंग ऑफिसर ही नाम जोड़ने या हटाने का निर्णय ले सकते हैं। सीईओ द्वारा आवेदन स्वीकार करना पूरी तरह अवैध है।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा एजेंटों ने राज्यभर में बड़े पैमाने पर फार्म–6 जमा करवा कर फर्जी तरीके से वोटर जोड़ने की कोशिश की। उनके अनुसार, बिहार, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से लोगों के नाम जोड़े जाने का यह पैटर्न पहले भी अन्य राज्यों में देखने को मिला था।

सीईओ ने दी सफाई

मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) मनोज अग्रवाल ने अभिषेक बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस की शिकायतों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि पूरे वर्ष कोई भी नया मतदाता फार्म–6 के जरिए आवेदन कर सकता है और उनका नाम मतदाता सूची में जोड़ने के लिए यह आवेदन वैध है। सीईओ ने स्पष्ट किया कि जिन लोगों के नाम जोड़ने की कोशिश की जा रही थी, वे असल में राज्य के निवासी थे और फार्म–6 के जरिए उनका आवेदन नियम अनुसार किया गया था।

सीईओ ने बताया कि उन्होंने प्रारंभिक जांच में देखा कि नोपाड़ा जिले से 107 आवेदन आए, जिनमें फार्म–6 भी शामिल था। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने का अधिकार केवल एरजुडिकेटिंग ऑफिसर के पास है। सीईओ या डीईओ इसे व्यक्तिगत रूप से जोड़ या हटा नहीं सकते।

तृणमूल और भाजपा के बीच तनाव

फार्म–6 विवाद के कारण सोमवार और मंगलवार को कोलकाता के सीईओ कार्यालय के बाहर तनावपूर्ण स्थिति बन गई। तृणमूल समर्थकों और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हुई। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए बलप्रयोग किया और केंद्रीय बल भी तैनात किया गया।

तृणमूल कांग्रेस ने हेयर स्ट्रीट थाना में मामला दर्ज कराया और आरोप लगाया कि भाजपा की ओर से बड़े पैमाने पर अवैध फार्म–6 जमा किए गए। वहीं भाजपा नेताओं ने आरोपों को आधारहीन बताते हुए कहा कि यह केवल चुनावी राजनीति है और सभी फार्म वैध हैं।

अभिषेक बनर्जी का सोशल मीडिया पर बयान

अभिषेक बनर्जी ने ट्विटर और अन्य प्लेटफॉर्म पर लिखा कि बंगाल में भाजपा का असली खेल वोटर सूची में हेरा-फेरी करना है। उनका दावा है कि उन्होंने इसे कई राज्यों में पहले भी देखा है। उनका कहना है कि ईवीएम से ज्यादा खतरा वोटर सूची में बदलाव का है।

चुनावी सभा में ममता बनर्जी का आरोप

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पश्चिम मेदिनीपुर के चंद्रकोणा में अपने चुनावी भाषण में कहा कि तृणमूल कांग्रेस नेताओं ने बाहर के मतदाताओं को जोड़ने की भाजपा की योजना को पकड़ लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार और अन्य राज्यों से लोग बंगाल लाए जा रहे हैं ताकि वोट पर असर डाला जा सके।

फार्म–6 विवाद ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 को और उथल-पुथल वाला बना दिया है। अभिषेक बनर्जी और ममता बनर्जी की ओर से लगाए गए आरोप और चुनाव आयोग को भेजे गए पत्र ने इस मामले को और गंभीर बना दिया है। सीईओ की सफाई के बावजूद राजनीतिक खींचतान जारी है। अब यह देखना होगा कि चुनाव आयोग इस मामले में क्या कदम उठाता है।

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