करीब 1 महीने पहले ही SIR के मामले में सुप्रीम कोर्ट में बतौर वकील पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बहस में शामिल हुई थी। उस दिन को भारतीय सुप्रीम कोर्ट के लिए एक ऐतिहासिक दिन बताया गया था।
अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट के लिए ऐसा ही इतिहास रच डाला है। बतौर राष्ट्रपति वह पहले व्यक्ति हैं जो इस गद्दी पर रहते हुए अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ में खुद हाजिर हुए।
क्या है मामला?
बुधवार (1 अप्रैल) को अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट में जन्मगत नागरिकता (Birthright Citizenship) प्रदान करने को रद्द करने वाले मामले की सुनवाई होनी थी। उसी सुनवाई के दौरान कोर्टरुम में डोनाल्ड ट्रंप खुद उपस्थित थे। अमेरिका के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब कोई राष्ट्रपति सुप्रीम कोर्ट में चल रहे किसी मामले की सुनवाई के दौरान खुद उपस्थित रहा हो।
हालांकि वह वहां पर ममता बनर्जी की तरह एक वकील नहीं बल्कि एक दर्शक के तौर पर उपस्थित थे। व्हाईट हाउस के अधिकारियों का दावा है कि मामले की गंभीरता को समझते हुए ही ट्रंप वहां मौजूद थे।
गौरतलब है कि जनवरी 2025 में दूसरी बार सत्ता में आने के बाद अमेरिकी संविधान की 14वें संशोधन को चुनौती देते हुए उन्होंने यह निर्देश दिया था। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ही पिछली फरवरी में ही ट्रंप प्रशासन द्वारा लादे गए भारी मात्रा में ग्लोबल टैरिफ को भी खारिज कर दिया था। जन्मगत नागरिकता प्रदान करने को रद्द करने के डोनाल्ड ट्रंप के फैसले को जिन लोगों ने चुनौती दी है, उसमें भारतीय मूल की वकील स्मिता घोष भी शामिल है।
कौन है स्मिता घोष?
आमतौर पर स्मिता लोगों की नजरों से दूर ही रहती हैं लेकिन कानूनी विशेषज्ञता और कोर्टरुम रणनीतियों की वजह से इन दिनों वह अमेरिका में खासी लोकप्रिय हो रही हैं। स्मिता घोष के लिंक्डिन प्रोफाइल से मिली जानकारी के अनुसार स्मिता ने स्वार्थमोर कॉलेज से इतिहास की पढ़ाई की है।
इसके बाद उन्होंने पेंसिल्वेनिया यूनिवर्सिटी के कैरी लॉ स्कूल से 'ज्यूरिस डॉक्टर' की डिग्री हासिल की। यहां उन्होंने 'कम लॉड' (विशेष सम्मान) के साथ स्नातक भी किया। कानून की ट्रेनिंग के अलावा स्मिता घोष ने पेंसिल्वेनिया यूनिवर्सिटी से कानूनी इतिहास में PhD भी की है।