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भारत-रूस संसदीय संबंधों को नयी मजबूती: बिरला और याकुशेव की मुलाकात से सहयोग को नया आयाम

नरेंद्र मोदी और व्लादिमीर पुतिन की कूटनीति से संसद स्तर पर बढ़ेगा सहयोग, व्यापार, ऊर्जा और तकनीकी क्षेत्रों में खुलेंगे नए अवसर

By डॉ. अभिज्ञात

Apr 02, 2026 23:21 IST

नयी दिल्लीः भारत और रूस के बीच संसदीय संबंधों को और मजबूत बनाने की दिशा में नए संवाद और सहयोग की पहल तेज़ होती दिख रही है। इसी क्रम में रूस के एक संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने व्लादिमीर याकुशेव के नेतृत्व में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से संसद भवन में मुलाकात की।

लोकसभा अध्यक्ष ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए याकुशेव को उनके नए दायित्व के लिए शुभकामनाएँ दीं और कहा कि यह नियुक्ति भारत-रूस संसदीय संबंधों को और सशक्त बनाने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि दोनों देशों के बीच संबंध लंबे समय से विश्वास और आपसी समझ पर आधारित रहे हैं।

उन्होंने बताया कि भारत की स्वतंत्रता के बाद से ही रूस एक भरोसेमंद सहयोगी रहा है और दोनों देशों के बीच लोगों के स्तर पर भी गहरे संबंध बने हुए हैं। हाल के वर्षों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई बैठकों ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत किया है।

बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने इंटर-पार्लियामेंटरी यूनियन, ब्रिक्स और जी20 जैसे मंचों पर सहयोग को और बढ़ाने पर जोर दिया। रक्षा, व्यापार और आर्थिक क्षेत्रों के साथ-साथ अंतरिक्ष, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और स्वच्छ ऊर्जा जैसे नए क्षेत्रों में भी साझेदारी की संभावनाएँ जताई गईं।

सांस्कृतिक संबंधों की बात करते हुए यह भी कहा गया कि रूस में बड़ी संख्या में भारतीय छात्र पढ़ रहे हैं और वहां योग तथा भारतीय फिल्मों की लोकप्रियता बढ़ रही है। मॉस्को में आयोजित ‘भारत उत्सव’ का उदाहरण देते हुए सांस्कृतिक जुड़ाव को और मजबूत बताया गया।

लोकसभा अध्यक्ष ने यह भी सुझाव दिया कि इंटर-पार्लियामेंटरी कमीशन की अगली बैठक जल्द आयोजित की जानी चाहिए क्योंकि इसकी पिछली बैठक 2018 में हुई थी। साथ ही, भारत-रूस संसदीय मित्रता समूह के गठन को भी सकारात्मक कदम बताया गया।

वहीं, याकुशेव ने भारत की मेहमाननवाजी के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी रूस के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने ब्रिक्स और अन्य मंचों पर सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया और बताया कि इस वर्ष भारत ब्रिक्स संसदीय मंच की मेजबानी करेगा।

उन्होंने यह भी जानकारी दी कि रूस में 35,000 से अधिक भारतीय छात्र अध्ययन कर रहे हैं और दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा और अन्य क्षेत्रों में सहयोग की बड़ी संभावनाएँ हैं। बैठक का समापन सकारात्मक माहौल में हुआ, जहां दोनों पक्षों ने भविष्य में संबंधों को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

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