वॉशिंगटन/दुबईः ईरान के साथ चल रहे युद्ध में अमेरिका को एक दुर्लभ सैन्य झटका लगा है। लगभग दो दशकों में पहली बार ऐसा हुआ है, जब किसी अमेरिकी लड़ाकू विमान को दुश्मन की कार्रवाई में गिराया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक ईरान ने एक अमेरिकी F-15E स्ट्राइक ईगल फाइटर जेट को निशाना बनाया। इस घटना में एक क्रू सदस्य को सुरक्षित बचा लिया गया, जबकि दूसरे की तलाश अभी भी जारी है।
इसी क्रम में ईरानी सरकारी मीडिया ने यह भी दावा किया कि एक अमेरिकी A-10 अटैक एयरक्राफ्ट फारस की खाड़ी क्षेत्र में ईरानी रक्षा बलों की कार्रवाई के बाद गिर गया। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने इस पर स्पष्ट रूप से पुष्टि नहीं की है कि विमान को मार गिराया गया या वह तकनीकी कारणों से दुर्घटनाग्रस्त हुआ।
कैसे गिराया गया विमान? विशेषज्ञों ने बताई संभावित वजह
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस हमले में पोर्टेबल, कंधे से दागी जाने वाली मिसाइल का इस्तेमाल किया गया हो सकता है, जो कम ऊंचाई पर उड़ रहे विमानों के लिए ज्यादा खतरनाक होती है।
बताया जा रहा है कि अमेरिकी विमान इन दिनों अपेक्षाकृत कम ऊंचाई पर मिशन चला रहे थे, जिससे वे ईरान की मिसाइलों की जद में आ सकते हैं। ऐसे हथियारों को पहचानना मुश्किल होता है, जिससे उनका खतरा और बढ़ जाता है।
2003 के बाद पहली बार ऐसा नुकसान
जानकारों के अनुसार इससे पहले आखिरी बार 2003 में इराक युद्ध के दौरान एक अमेरिकी A-10 विमान को मार गिराया गया था। विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कई वर्षों में अमेरिका ज्यादातर ऐसे दुश्मनों से लड़ता रहा, जिनके पास मजबूत एंटी-एयरक्राफ्ट क्षमता नहीं थी। यही वजह है कि इतने लंबे समय तक अमेरिकी फाइटर जेट सुरक्षित रहे।
पायलटों की ट्रेनिंग: विमान गिरने की स्थिति में क्या होता है
सैन्य विशेषज्ञ बताते हैं कि उच्च खतरे वाले मिशनों में पायलट लगातार सतर्क रहते हैं और मिसाइल हमले की स्थिति में बचाव के लिए विशेष रणनीतियों का इस्तेमाल करते हैं। यदि विमान को नुकसान पहुंचता है तो पायलट को तुरंत इजेक्ट करना होता है। इसके बाद उनकी ट्रेनिंग का सबसे अहम हिस्सा होता है-अपनी लोकेशन सुरक्षित तरीके से साझा करना ताकि बचाव दल उन्हें ढूंढ सके क्योंकि दुश्मन भी इन संकेतों को ट्रैक करने की कोशिश करता है।
हेलीकॉप्टर मिशन ज्यादा जोखिम भरे
विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे रेस्क्यू ऑपरेशन में हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल किया जाता है, जो कम ऊंचाई और धीमी गति के कारण ज्यादा खतरे में रहते हैं। इसके बावजूद हालिया घटनाओं में बचाव अभियान में शामिल टीमों ने जोखिम उठाकर लापता क्रू की तलाश जारी रखी है, जिसे सैन्य विशेषज्ञ बेहद साहसिक कदम मानते हैं।