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ट्रंप की ईरान को चेतावनी: '48 घंटे में मान जाओ या तबाही को तैयार रहो', होर्मुज पर आर-पार की जंग

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर नई धमकी दी है। उन्होंने कहा है कि ईरान को 10 दिनों का दिया समय तेजी से खत्म हो रहा है।

By लखन भारती

Apr 04, 2026 22:17 IST

वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि मैंने ईरान को होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए 10 दिनों का समय दिया था। उन्होंने कहा कि ईरान के पास अब सिर्फ 48 घंटों का समय है। ट्रंप ने चेतावनी दी कि ईरान अगर अब भी नहीं माना तो अमेरिका उस पर कहर बनकर टूट पड़ेगा। इस बीच मध्य पूर्व में अमेरिका सैन्य तैनाती में जबरदस्त इजाफा हुआ है। अमेरिका ने हजारों सैनिकों और बड़े पैमाने पर युद्धपोतों को तैनात किया है। वह ईरान पर जमीनी हमले की भी धमकियां दे रहे हैं।

ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर क्या लिखा

ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर लिखा, "याद है जब मैंने ईरान को कोई समझौता करने या होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के लिए दस दिन का समय दिया था ? समय तेज़ी से बीत रहा है-48 घंटे बाद उन पर कहर टूट पड़ेगा। ईश्वर की महिमा हो! राष्ट्रपति डोनाल्ड जे. ट्रंप।"

ट्रंप ने होर्मुज को लेकर क्या कहा

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को संकेत दिया कि तेल से लाभ कमाने के लिए होर्मुज स्‍ट्रेट को फिर से खोला जा सकता है और इसे भारी मुनाफा कमाने का अवसर बताया, क्‍योंक‍ि समुद्री यातायात में धीरे-धीरे सुधार के संकेत मिल रहे हैं। ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “थोड़ा और समय मिलने पर हम आसानी से होर्मुज स्‍ट्रेट खोल सकते हैं, तेल ले सकते हैं और बड़ा मुनाफा कमा सकते हैं। यह दुनिया के लिए ‘गशर’ साबित होगा।”

होर्मुज से बेहद कम जहाजों की आवाजाही

मैरीटाइम इंटेलिजेंस फर्म विंडवर्ड के अनुसार, एक अप्रैल को 16 जहाज इस स्‍ट्रेट से गुजरे, जो गंभीर व्यवधान के बाद लगातार तीसरा दिन था जब आवाजाही दर्ज की गई। एक अलग आंकड़ों के मुताबिक, बुधवार को 16 मालवाहक जहाज यहां से गुजरे, जो एक दिन पहले 11 थे। यह धीरे-धीरे सुधार का संकेत है, हालांकि यह अभी भी संघर्ष से पहले के स्तर से काफी कम है। यह व्यवधान मार्च के मध्य में शुरू हुआ था, जब ईरान ने अनिवार्य नेविगेशन कॉरिडोर लागू किया, जिसकी निगरानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) कर रहा था। इसके चलते जहाजों को अपने मार्ग बदलने पड़े और ईरानी निगरानी में संचालन करना पड़ा।

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