नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अडानी समूह द्वारा दिवालिया हो चुकी जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) के अधिग्रहण के लिए की गई 14,535 करोड़ रुपये की बोली पर कोई रोक लगाने से इंकार कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने एक सुरक्षा उपाय के तौर पर JAL की मॉनिटरिंग कमेटी को किसी भी महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय को लेने से पहले NCLAT की अनुमति लेने को कहा है।
कोर्ट ने कहा कि इस मामले की सुनवाई 10 अप्रैल से NCLAT में शुरू होगी और इसे जल्दी निपटाया जाए। सुप्रीम कोर्ट का मानना था कि दोनों पक्षों के बीच विवाद को अब NCLAT को ही सुलझाना चाहिए।
वेदांता और अडानी समूह के बीच विवाद
वेदांता ने इस बोली को चुनौती दी थी, दावा करते हुए कहा था कि उनका प्रस्ताव 17,926.21 करोड़ रुपये का था, जबकि अडानी का प्रस्ताव 14,535 करोड़ रुपये का था। वेदांता का तर्क था कि कर्जदाता ज्यादा पैसा प्राप्त करेंगे, अगर उनका प्रस्ताव लागू होता है। वहीं, अडानी समूह ने त्वरित भुगतान की पेशकश की थी, जिसे कर्जदाता समितियों ने प्राथमिकता दी।
अडानी समूह ने पहले ही अपने प्रस्ताव में कर्जदाता समिति से 89 प्रतिशत समर्थन प्राप्त किया था। वेदांता का प्रस्ताव हालांकि अधिक था, लेकिन अडानी का प्रस्ताव तेजी से भुगतान और अधिक धनराशि को प्राथमिकता देने के कारण कर्जदाता समिति द्वारा स्वीकार किया गया।
जेएएल की संपत्तियां और परियोजनाएं
अडानी समूह का लक्ष्य जेएएल की प्रमुख संपत्तियों, जैसे रियल एस्टेट, सीमेंट निर्माण, और ऊर्जा उद्योग की कंपनियों को अधिग्रहित करना था। जेएएल के पास प्रमुख परियोजनाएं, जैसे जयपी ग्रीन (ग्रेटर नोएडा) और जयपी इंटरनेशनल स्पोर्ट्स सिटी हैं। इसके अलावा, इसके पास उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में सीमेंट प्लांट्स, और दिल्ली-एनसीआर, मसूरी और आगरा में होटल प्रॉपर्टीज भी हैं।
अदालत का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर हस्तक्षेप न करते हुए मामले को NCLAT पर छोड़ दिया और दोनों पक्षों से अपील की कि वे NCLAT के समक्ष अपनी दलीलें पेश करें। कोर्ट ने यह भी सुनिश्चित किया कि मामले की शीघ्र सुनवाई की जाएगी।
इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि जेएएल के अधिग्रहण की प्रक्रिया अब NCLAT के फैसले के आधार पर आगे बढ़ेगी और इसमें कई महत्वपूर्ण निर्णय हो सकते हैं, जो कर्ज पुनर्निर्माण और बड़े व्यवसायों के पुनर्गठन की दिशा तय करेंगे।