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LPG कालाबाजारी पर देशव्यापी एक्शन: 3700 छापे, सप्लाई बनाए रखने के लिए सरकार हाई अलर्ट पर

होर्मुज संकट से बढ़ा दबाव, जमाखोरी रोकने के लिए सख्ती। घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता, डिजिटल बुकिंग और वैकल्पिक ईंधन पर जोर।

By श्वेता सिंह

Apr 06, 2026 09:45 IST

नई दिल्ली: एलपीजी की कालाबाजारी और जमाखोरी से आम लोगों को हो रही दिक्कतों के बीच केंद्र सरकार ने देशभर में व्यापक कार्रवाई शुरू कर दी है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (Ministry of Petroleum and Natural Gas) के अनुसार, रसोई गैस की आपूर्ति को सुचारू बनाए रखने और कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए एक दिन में 3700 से अधिक छापेमारी की गई है।

सरकार का कहना है कि यह सख्ती ऐसे समय में की जा रही है जब पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद रहने से ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बना हुआ है। इस स्थिति का फायदा उठाकर कुछ जगहों पर गैस की जमाखोरी और ऊंचे दामों पर बिक्री की शिकायतें सामने आई थीं।

क्यों बढ़ी परेशानी: संकट और मांग का दबाव

वैश्विक हालात के चलते एलपीजी सप्लाई प्रभावित हुई है, जिससे बाजार में अनिश्चितता बढ़ी। इसी बीच कुछ उपभोक्ताओं ने पैनिक बुकिंग शुरू कर दी, जिससे मांग अचानक बढ़ गई।

इसका सीधा असर यह हुआ कि कई इलाकों में डिलीवरी में देरी और सिलेंडर की उपलब्धता को लेकर चिंता पैदा हुई। हालांकि सरकार ने साफ किया है कि देश में कहीं भी एलपीजी पूरी तरह खत्म होने की स्थिति (ड्राई-आउट) नहीं है।

OMC को सख्त निर्देश, डिस्ट्रीब्यूटर्स पर कार्रवाई

ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (Oil Marketing Companies)- इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड को निर्देश दिए गए हैं कि वे वितरण प्रणाली पर कड़ी निगरानी रखें और अचानक निरीक्षण (सरप्राइज चेक) बढ़ाएं।

अब तक करीब 1000 एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स को शो-कॉज नोटिस जारी किए जा चुके हैं, जबकि 27 डिस्ट्रीब्यूटरशिप्स को निलंबित किया गया है। सरकार का कहना है कि दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ आगे और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

डिलीवरी सिस्टम में सुधार: तकनीक से पारदर्शिता

कालाबाजारी रोकने के लिए डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (Delivery Authentication Code) आधारित डिलीवरी को तेजी से लागू किया गया है। यह फरवरी 2026 के 53% से बढ़कर अब 89% तक पहुंच गया है।

इस सिस्टम के तहत उपभोक्ता के पास एक कोड भेजा जाता है, जिसे डिलीवरी के समय साझा करने पर ही सिलेंडर दिया जाता है। इससे बीच में होने वाली गड़बड़ी और डायवर्जन की संभावना कम हो गई है।

आपूर्ति बनाए रखने की कोशिश: बड़े स्तर पर डिलीवरी

सरकार के मुताबिक, एक दिन में करीब 51 लाख घरेलू एलपीजी सिलेंडर की डिलीवरी की गई, जो मौजूदा दबाव के बावजूद सप्लाई बनाए रखने के प्रयासों को दर्शाता है।

ऑनलाइन बुकिंग को भी बढ़ावा मिला है और अब 95% तक सिलेंडर बुकिंग डिजिटल माध्यम से हो रही है, जिससे भीड़ और अव्यवस्था कम हुई है।

छोटे सिलेंडर और PNG: वैकल्पिक समाधान

बढ़ती मांग को संतुलित करने के लिए 5 किलो के छोटे LPG सिलेंडर (FTL) की उपलब्धता बढ़ाई गई है। एक दिन में 71 हजार से ज्यादा ऐसे सिलेंडर बिके, जबकि 23 मार्च से अब तक लगभग 5.7 लाख सिलेंडर की बिक्री हो चुकी है।

इसके अलावा PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) को भी तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है। मार्च 2026 से अब तक 3.5 लाख से अधिक नए कनेक्शन सक्रिय किए जा चुके हैं और 3.8 लाख उपभोक्ताओं ने आवेदन किया है।

कमर्शियल सप्लाई में कटौती, घरेलू उपभोक्ता प्राथमिकता पर

सरकार ने कमर्शियल एलपीजी की आपूर्ति को प्री-क्राइसिस स्तर के 70% तक सीमित कर दिया है, ताकि घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता दी जा सके।

साथ ही, वैकल्पिक ईंधन जैसे केरोसिन और कोयले की उपलब्धता बढ़ाई जा रही है। कोल इंडिया और अन्य इकाइयों को राज्यों को अतिरिक्त कोयला उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

जनता के लिए एडवाइजरी: जिम्मेदारी से करें उपयोग

-सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे अफवाहों से बचें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें।

-जरूरत के अनुसार ही एलपीजी बुक करें

-पैनिक बाइंग से बचें

-डिजिटल माध्यम का इस्तेमाल करें

-जहां संभव हो, PNG, इंडक्शन या इलेक्ट्रिक कुकटॉप का उपयोग करें

-ऊर्जा की बचत पर ध्यान दें

कानूनी सख्ती और लगातार निगरानी

सरकार ने स्पष्ट किया है कि आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 (Essential Commodities Act, 1955) और LPG कंट्रोल ऑर्डर 2000 के तहत राज्यों को कालाबाजारी और जमाखोरी के खिलाफ कार्रवाई करने के व्यापक अधिकार दिए गए हैं।

छापेमारी और निगरानी अभियान आगे भी जारी रहेगा, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी को तुरंत रोका जा सके। सरकार का दावा है कि मौजूदा चुनौतियों के बावजूद देश में एलपीजी की उपलब्धता बनी हुई है और सप्लाई चेन को सुचारू रखने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं।

हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि जब तक वैश्विक हालात सामान्य नहीं होते, तब तक सतर्कता और संसाधनों के संतुलित उपयोग की जरूरत बनी रहेगी।

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