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20 साल बाद ऐतिहासिक फैसला: जग्गी हत्याकांड में अमित जोगी को उम्रकैद, ट्रायल कोर्ट का बरी करने वाला आदेश रद्द

पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के परिवार को झटका, कोर्ट के फैसले से बढ़ी राजनीतिक चुनौतियां, चुनावी राजनीति पर पड़ेगा असर?

By डॉ. अभिज्ञात

Apr 06, 2026 18:17 IST

रायपुरः 2003 में हुए चर्चित रामअवतार जग्गी हत्याकांड में एक बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

यह निर्णय 2 अप्रैल को रमेश सिन्हा और अरविंद कुमार वर्मा के खंडपीठ द्वारा सुनाया गया। इस आदेश की प्रति बाद में उच्च न्यायालय की वेबसाइट पर अपलोड की गई।

ट्रायल कोर्ट के फैसले को बताया ‘गलत और अवैध’

उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि वर्ष 2007 में ट्रायल कोर्ट द्वारा अमित जोगी को बरी किया जाना पूरी तरह त्रुटिपूर्ण, अवैध और तथ्यों के विपरीत था। अदालत के अनुसार ट्रायल जज का निर्णय उपलब्ध साक्ष्यों के अनुरूप नहीं था और बिना किसी ठोस आधार के दिया गया था। इसलिए उस फैसले को निरस्त कर दिया गया।

किन धाराओं में दोषी करार

हाई कोर्ट ने अमित जोगी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) तथा धारा 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत दोषी ठहराया।

इसके तहत उन्हें आजीवन कारावास की सजा, 1,000 रुपये का जुर्माना, जुर्माना न देने पर 6 महीने की अतिरिक्त सजा दी गई है।

हत्याकांड की पृष्ठभूमि

4 जून 2003 को नेशनल कांग्रेस पार्टी (NCP) के नेता रामअवतार जग्गी की हत्या कर दी गई थी। उस समय राज्य में अजीत जोगी मुख्यमंत्री थे। यह मामला राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील माना गया था।

जांच और आरोपपत्र

शुरुआत में इस मामले की जांच राज्य पुलिस ने की थी, लेकिन बाद में इसे सीबीआई को सौंप दिया गया। सीबीआई ने अपनी जांच के बाद कई अभियुक्तों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की, जिनमें अमित जोगी भी शामिल थे।

2007 का ट्रायल कोर्ट फैसला

31 मई 2007 को रायपुर की ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में 28 अभियुक्तों के खिलाफ आरोप सिद्ध माना। हालांकि उसी फैसले में अमित जोगी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया था।

अपील और कानूनी प्रक्रिया

सीबीआई ने अमित जोगी की बरी किए जाने के खिलाफ अपील करने की कोशिश की। लेकिन 2011 में हाई कोर्ट ने देरी के आधार पर उसकी याचिका खारिज कर दी। इसके अलावा छत्तीसगढ़ सरकार और मृतक के पुत्र सतीश जग्गी द्वारा दायर अलग-अलग अपीलें भी खारिज हो गईं।


सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप

मामले में नया मोड़ नवंबर 2025 में आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट को निर्देश दिया कि वह सीबीआई की उस याचिका पर पुनर्विचार करे, जिसमें अमित जोगी की बरी होने के खिलाफ अपील करने की अनुमति मांगी गई थी।

पुनः सुनवाई और अंतिम फैसला

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद हाई कोर्ट ने पिछले महीने इस मामले की सुनवाई फिर से शुरू की। विस्तृत विचार-विमर्श और साक्ष्यों के पुनर्मूल्यांकन के बाद अदालत ने अंततः ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलटते हुए अमित जोगी को दोषी करार दिया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

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