नई दिल्लीः नई दिल्ली में भाजपा के 47वें स्थापना दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पार्टी कार्यकर्ताओं को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय राजनीति को नए स्वरूप में ढालने की दिशा में पार्टी लगातार काम कर रही है। उन्होंने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) और वन नेशन-वन इलेक्शन (ONOE) जैसे मुद्दों को इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि पार्टी की कार्यशैली सेवा भाव पर आधारित है और इसी सोच के तहत कई बड़े फैसले लिए गए हैं। उन्होंने ब्रिटिश काल के अनेक पुराने कानूनों को समाप्त करने, नए संसद भवन के निर्माण, सामान्य वर्ग के गरीबों को 10 प्रतिशत आरक्षण, तीन तलाक पर प्रतिबंध लगाने वाला कानून, CAA और अयोध्या में राम मंदिर निर्माण जैसे कदमों को पार्टी की उपलब्धियों के रूप में गिनाया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी का यह मिशन अभी जारी है।
उन्होंने कहा कि देश में इस समय यूनिफॉर्म सिविल कोड और वन नेशन-वन इलेक्शन जैसे विषयों पर गंभीर चर्चा हो रही है, जो राष्ट्रीय एकता और प्रभावी प्रशासन के प्रति पार्टी की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उनका लक्ष्य विकसित और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण करना है, जिसके लिए पार्टी लगातार काम करती रहेगी।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि आने वाले वर्षों में भाजपा अपने 50 साल पूरे करेगी, जो एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी। इस अवसर को ध्यान में रखते हुए नए लक्ष्य तय करने और बदलती तकनीक के साथ खुद को ढालने की जरूरत है।
उन्होंने भारतीय राजनीति में नेशन फर्स्ट के सिद्धांत को प्रमुख बताते हुए कहा कि भाजपा ने इसे व्यवहार में उतारा है। साथ ही उन्होंने 1984 के दौर का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय कांग्रेस को बड़ी जीत मिली थी, लेकिन जनता की अपेक्षाएं पूरी नहीं हो पाईं। ऐसे माहौल में लोगों का भरोसा धीरे-धीरे भाजपा की ओर बढ़ा और पार्टी ने चुनावी सफलता हासिल करनी शुरू की।
उन्होंने कहा कि देश की राजनीति में अब दो अलग धाराएं स्पष्ट हैं-एक सत्ता केंद्रित राजनीति और दूसरी सेवा आधारित राजनीति। भाजपा ने सेवा को प्राथमिकता दी है।
प्रधानमंत्री ने कांग्रेस और भाजपा के दृष्टिकोण में अंतर बताते हुए कहा कि जहां कांग्रेस ने हमेशा एक परिवार को महत्व दिया, वहीं भाजपा सभी को समान सम्मान देती है।
विदेश नीति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पहले भारत कई देशों से दूरी बनाए रखता था, लेकिन आज का भारत सभी देशों के साथ संबंध मजबूत कर रहा है।
भाजपा के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि इसकी जड़ें जनसंघ में हैं, जो 1977 में आपातकाल के बाद जनता पार्टी में शामिल हुआ था। बाद में आरएसएस से जुड़े सदस्यों की दोहरी सदस्यता को लेकर विवाद हुआ, जिसके चलते जनसंघ से जुड़े नेताओं ने अलग होकर 6 अप्रैल 1980 को भारतीय जनता पार्टी की स्थापना की।