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Assam Election: चाय जनजाति पर सियासी घमासान तेज, जे पी नड्डा ने कहा-कांग्रेस ने सिर्फ वोट लिया, विकास नहीं किया

डूमडूमा से उठी आवाज। रुपेश गोवाला के समर्थन में रैली। घुसपैठ, जमीन और रोजगार-असम चुनाव में गरमाए बड़े मुद्दे।

By श्वेता सिंह

Apr 06, 2026 15:55 IST

तिनसुकियाः असम विधानसभा चुनाव 2026 के मद्देनजर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और पूर्व भाजपा अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा (Jagat Prakash Nadda) ने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उसने चाय जनजाति (टी ट्राइब्स) को केवल वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया और उनके विकास के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

डूमडूमा विधानसभा क्षेत्र में भाजपा उम्मीदवार रुपेश गोवाला (Rupesh Gowala) के समर्थन में आयोजित रैली को संबोधित करते हुए नड्डा ने कहा, “कांग्रेस ने चाय जनजाति के भविष्य को अंधकार में धकेल दिया। हर पांच साल में वोट लेने के बाद उन्हें भुला दिया गया।”

घुसपैठ और तुष्टिकरण का आरोप

नड्डा ने कांग्रेस शासन पर आरोप लगाया कि उस दौरान असम में घुसपैठियों को बढ़ावा मिला। उन्होंने कहा कि उन्हें आधार और स्वास्थ्य योजनाओं के कार्ड देकर तुष्टिकरण की राजनीति की गई। उन्होंने यह भी दावा किया कि ये घुसपैठिए आदिवासियों और गरीबों की जमीन पर कब्जा कर रहे हैं और भाजपा की सरकार बनने पर ऐसी जमीन वापस दिलाई जाएगी तथा अवैध प्रवासियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

चाय जनजाति: चुनावी राजनीति का केंद्र

असम की चाय जनजाति राज्य की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाती है। करीब 70 लाख की आबादी वाला यह समुदाय राज्य की कुल जनसंख्या का लगभग 20 प्रतिशत है, जबकि लगभग 35 लाख मतदाता 35 से अधिक विधानसभा सीटों पर असर रखते हैं।

यह समुदाय मूलतः 19वीं सदी में ब्रिटिश काल के दौरान झारखंड, ओडिशा, बिहार और मध्य प्रदेश के आदिवासी इलाकों से लाए गए मजदूरों के वंशज हैं, जिनमें ओरांव, मुंडा, संथाल और खड़िया जैसी जनजातियां शामिल हैं।

भाजपा के दावे और योजनाएं

नड्डा ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में भाजपा सरकार ने असम में शांति, स्थिरता और विकास सुनिश्चित किया है। उन्होंने बताया कि चाय बागान मजदूरों की दैनिक मजदूरी 2016 में 126 रुपये से बढ़कर अब 280 रुपये (ब्रह्मपुत्र घाटी) हो गई है। भाजपा ने इसे बढ़ाकर 500 रुपये करने का वादा किया है। 28,241 परिवारों को भूमि पट्टे दिए गए हैं, जबकि 3.33 लाख परिवारों को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य है। ‘एती कोली दुति पात’ योजना के तहत 6 लाख मजदूरों को 5,000 रुपये की सहायता दी गई। इसके अलावा शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़क विकास पर भी जोर देने की बात कही गई।

कांग्रेस बनाम भाजपा: वादों की होड़

जहां भाजपा चाय जनजाति के लिए विकास योजनाओं और सख्त घुसपैठ विरोधी नीति पर जोर दे रही है, वहीं कांग्रेस ने भी इस समुदाय को साधने के लिए एसटी दर्जा और 450 रुपये दैनिक मजदूरी का वादा किया है।

डूमडूमा सीट पर भाजपा के रुपेश गोवाला का मुकाबला कांग्रेस के Durga Bhumij से है। इस क्षेत्र में चाय जनजाति मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं।

9 अप्रैल को मतदान, 4 मई को नतीजे

असम में विधानसभा चुनाव 9 अप्रैल 2026 को एक चरण में होंगे, जबकि मतगणना 4 मई को की जाएगी। चुनावी मुकाबले में चाय जनजाति एक अहम फैक्टर बनकर उभरी है, जिस पर सभी दलों की नजर टिकी हुई है।

असम चुनाव 2026 में चाय जनजाति का मुद्दा राजनीतिक विमर्श के केंद्र में है। जगत प्रकाश नड्डा के कांग्रेस पर लगाए गए आरोप और भाजपा की घोषणाएं यह संकेत देती हैं कि इस समुदाय का समर्थन चुनाव परिणामों को निर्णायक रूप से प्रभावित कर सकता है।

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