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विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कसबा थाना के ओसी को आयोग ने किया निलंबित, क्यों?

चुनाव प्रक्रिया के हिस्सा के तौर पर दागी अपराधियों की सूची चुनाव आयोग ने मांगी थी। कसबा थाना की सूची में सोना पप्पू का नाम नहीं होने से आयोग के अधिकारियों क

By Moumita Bhattacharya, Shyam Gopal Ray

Apr 06, 2026 11:36 IST

कर्तव्य में लापरवाही के आरोप में कसबा थाना के ओसी विश्वनाथ देवनाथ को चुनाव आयोग ने निलंबित कर दिया है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार इलाके के दागी अपराधियों की सूची में विश्वजीत पोद्दार उर्फ सोना पप्पू का नाम न रहने की वजह से ही आयोग ने यह कदम उठाया है। वहीं दूसरी ओर सोना पप्पू को ED ने तलब भी किया है।

चुनाव प्रक्रिया के हिस्सा के तौर पर प्रत्येक थानाक्षेत्र से दागी अपराधियों की सूची चुनाव आयोग ने मांगी थी। सभी थानों से ही यह सूची भेजी गयी थी लेकिन कसबा थाना की सूची में सोना पप्पू का नाम नहीं होने से आयोग के अधिकारियों को आश्चर्य हुआ था। इस बारे में गत शनिवार को ओसी से जवाब तलब भी की गयी थी।

लेकिन विश्वनाथ पोद्दार के जवाब से आयोग संतुष्ट नहीं हुआ था। सवाल उठाया गया कि दक्षिण कोलकाता का 'त्रास' सोना पप्पू का नाम दागी अपराधियों की सूची में कैसे नहीं रखा गया? इसके बाद ही चुनाव आयोग ने ओसी को निलंबित करने का फैसला लिया।

गौरतलब है कि कसबा और तपसिया इलाके में सोना पप्पू का बोलबाला कम नहीं है। वर्ष 2015 में बालीगंज रेल यार्ड इलाके को दखल करने को लेकर हुए एक बड़े संघर्ष में पहली बार उसका नाम सामने आया था। इसके बाद 2017 में हत्या के मामले से लेकर बाद में रवींद्र सरोवर इलाके में आपसी संघर्ष के मामले का भी मुख्य आरोपी सोना पप्पू को ही बनाया गया। भले की पुलिस के रजिस्टर में उसका नाम 'फरार' के तौर पर दर्ज है लेकिन विरोधी पार्टी के नेता लगातार इलाके में उसके प्रभाव को लेकर सवाल उठाते रहे हैं।

अब सोना पप्पू पर ED ने भी दबाव डालना शुरू कर दिया है। गत बुधवार को बालीगंज के फर्न रोड स्थित उसके घर पर ED ने काफी देर तक तलाशी अभियान चलाया था। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार वहां से हथियार, गाड़ी और संपत्ति से संबंधित कुछ दस्तावेज भी बरामद हुए। इन दस्तावेजों से ही पता चला कि भूमि से संबंधित धोखाधड़ी में भी उसका हाथ हो सकता है। इसके बाद ही अधिक जांच के लिए उसे सीजीओ कॉम्प्लेक्स में हाजिर होने का नोटिस भेजा गया। हालांकि देखने वाली बात होगी कि 'फरार' सोना पप्पू ED के तलब पर हाजिर होता है या नहीं।

कुछ प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि चुनाव से पहले ओसी का निलंबन और ED की यह सक्रियता ने दक्षिण कोलकाता की राजनीतिक समीकरणों में एक नया आयाम जोड़ा है।

विशेष रूप से एक प्रभावशाली जनप्रतिनिधि के साथ पप्पू की नजदीकी को लेकर विपक्षी पार्टी बार-बार सवाल उठा रहा है। हालांकि तृणमूल ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि इसका पार्टी से कोई संबंध नहीं है। पार्टी के प्रवक्ता अरूप चक्रवर्ती ने कहा कि किसी भी अपराधी के साथ तृणमूल का कोई संबंध नहीं है। कानून अपना काम करेगी।

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