नई दिल्ली: वैश्विक तेल बाजार में रविवार को तेज उछाल दर्ज किया गया, जब डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने ईरान (Iran) को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को तुरंत नहीं खोला गया तो ईरानी ऊर्जा ढांचे पर सैन्य कार्रवाई की जा सकती है। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में घबराहट बढ़ गई और कच्चे तेल की कीमतें ऊपर चली गईं।
सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, ब्रेंट क्रूड 1.4 प्रतिशत की बढ़त के साथ 110.60 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी कच्चा तेल (WTI) 1.8 प्रतिशत चढ़कर 113.60 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। गौरतलब है कि हाल के हफ्तों में ही कीमतें 100–110 डॉलर के ऊंचे दायरे में बनी हुई थीं, जबकि संघर्ष से पहले ये 70–80 डॉलर के आसपास थीं।
तनाव का केंद्र: होर्मुज जलडमरूमध्य
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत गुजरता है। इसके बंद होने से न सिर्फ तेल, बल्कि अन्य ऊर्जा और औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर भी असर पड़ रहा है।
ईरान ने साफ कर दिया है कि यह जलडमरूमध्य तब तक बंद रहेगा जब तक उसे युद्ध में हुए नुकसान की “पूरी भरपाई” नहीं मिल जाती। इस रुख ने संकट को और गहरा कर दिया है। हालांकि, कुछ सीमित जहाज ओमान (Oman) के जलक्षेत्र से होकर गुजरने में सफल हुए हैं, लेकिन सामान्य आवाजाही लगभग ठप है।
डोनाल्ड ट्रंप की सख्ती और ईरान की प्रतिक्रिया
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आक्रामक संदेश जारी कर ईरान पर दबाव बनाने की कोशिश की। इससे पहले वे 21 मार्च को दो दिन का अल्टीमेटम दे चुके थे, जिसे बाद में बढ़ाकर 6 अप्रैल कर दिया गया।
इसके जवाब में ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दो टूक कहा कि मौजूदा हालात में स्ट्रेट खोलने का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जब तक आर्थिक और युद्ध संबंधी नुकसान की भरपाई नहीं होती, तब तक यह प्रतिबंध जारी रहेगा।
कूटनीतिक कोशिशें: ओमान की पहल
बढ़ते तनाव के बीच ओमान (Oman) ने मध्यस्थ की भूमिका निभानी शुरू कर दी है। ओमान के विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की कि उसके प्रतिनिधियों ने ईरानी अधिकारियों से बातचीत की है। इन चर्चाओं में व्यापारी जहाजों को सुरक्षित रूप से स्ट्रेट से गुजरने देने के संभावित विकल्पों पर विचार किया गया। हालांकि, अभी तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है, जिससे अनिश्चितता बनी हुई है।
ओपेक+ का हस्तक्षेप: सीमित उत्पादन बढ़ोतरी
तेल बाजार में अस्थिरता को देखते हुए ओपेक+ (OPEC+) ने सप्लाई संतुलन बनाए रखने के लिए कदम उठाया है। आठ प्रमुख सदस्य देशों—सऊदी अरब, रूस, इराक, यूएई, कुवैत, कजाकिस्तान, अल्जीरिया और ओमान ने मई 2026 से 2,06,000 बैरल प्रतिदिन उत्पादन बढ़ाने का फैसला किया है।
यह निर्णय अप्रैल 2023 में घोषित 16.5 लाख बैरल प्रतिदिन की स्वैच्छिक कटौती को धीरे-धीरे वापस लेने की रणनीति का हिस्सा है।
सऊदी अरब और रूस: 62-62 हजार बैरल प्रतिदिन
इराक: 26 हजार बैरल
यूएई: 18 हजार बैरल
कुवैत: 16 हजार बैरल
कजाकिस्तान: 10 हजार बैरल
अल्जीरिया: 6 हजार बैरल
ओमान: 5 हजार बैरल
मई 2026 के लिए नए उत्पादन लक्ष्य भी तय किए गए हैं, जिनमें सऊदी अरब (10,228 हजार बैरल/दिन) और रूस (9,699 हजार बैरल/दिन) शीर्ष पर हैं।
समूह ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह हर महीने बाजार की समीक्षा करेगा और जरूरत पड़ने पर उत्पादन रणनीति में बदलाव किया जा सकता है। अगली बैठक 3 मई 2026 को प्रस्तावित है।
वैश्विक असर और भारत की चिंता
होर्मुज संकट का असर सबसे ज्यादा एशियाई देशों पर पड़ रहा है, जो बड़े पैमाने पर तेल आयात पर निर्भर हैं। भारत जैसे देशों के लिए ऊंची तेल कीमतें महंगाई, परिवहन लागत और आर्थिक संतुलन पर सीधा असर डाल सकती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह गतिरोध लंबा खिंचता है तो तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं। फिलहाल, ओपेक+ का सीमित उत्पादन बढ़ाना बाजार को कुछ हद तक स्थिर करने की कोशिश है, लेकिन असली दिशा भू-राजनीतिक हालात ही तय करेंगे।