नई दिल्लीः केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था अब अस्थायी झटकों से आगे बढ़कर स्थायी अस्थिरता के चरण में प्रवेश कर चुकी है, जिससे अनिश्चितता लगातार बढ़ रही है। उन्होंने यह बात राष्ट्रीय लोक वित्त एवं नीति संस्थानके स्वर्ण जयंती कार्यक्रम में कही।
वैश्विक संकटों ने बदली आर्थिक दिशा
वित्त मंत्री के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में कई बड़े घटनाक्रमों ने दुनिया की आर्थिक संरचना को प्रभावित किया है। इनमें कोविड-19 महामारी, रूस-यूक्रेन युद्ध, मध्य-पूर्व में बढ़ता तनाव और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अनिश्चितता शामिल हैं। इन सभी कारणों से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर लगातार दबाव बना हुआ है।
मध्य-पूर्व तनाव बना वैश्विक चिंता का कारण
उन्होंने कहा कि मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष अब केवल क्षेत्रीय मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और आर्थिक स्थिरता को प्रभावित कर रहा है। इसके कारण दुनिया एक नए बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है।
2025 में बढ़ी चुनौतियां
वर्ष 2025 को उन्होंने अपेक्षा से अधिक चुनौतीपूर्ण बताया। इस दौरान वैश्विक व्यापार में विभाजन बढ़ा, आपूर्ति श्रृंखलाएं प्रभावित हुईं और विकास दर के अनुमान घटाए गए। हालांकि वर्ष के अंत में कुछ सकारात्मक संकेत भी देखने को मिले, खासकर भारत के संदर्भ में।
बढ़ता वैश्विक कर्ज चिंता का विषय
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के आंकड़ों के अनुसार वैश्विक सार्वजनिक कर्ज लगभग 106 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है, जो वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद का 95 प्रतिशत से अधिक है। अमेरिका और जापान जैसे देशों में कर्ज का स्तर काफी ऊंचा है, जिससे उनके पास आर्थिक संकट से निपटने के सीमित विकल्प बचे हैं।
भारत की आर्थिक स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत
वित्त मंत्री ने कहा कि भारत की आर्थिक स्थिति अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में संतुलित है। देश का सरकारी कर्ज अनुपात नियंत्रित है और इसमें आगे कमी आने की संभावना है। इसके अलावा भारत का बाहरी कर्ज कम है और विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत स्थिति में है, जो आयात की आवश्यकताओं को लंबे समय तक पूरा कर सकता है।