नई दिल्लीः आईटी नियमों में प्रस्तावित बदलावों को लेकर देशभर में चर्चा और विरोध के बीच इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसी इंटरमीडियरी कंपनियों और सिविल सोसाइटी से जुड़े लोगों से बातचीत कर उनकी चिंताएं और सुझाव समझे गए।
सरकार का रुख-सुझावों के लिए खुला है दरवाजा
आईटी सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि सरकार इस मामले में खुले दिमाग से काम कर रही है और जो भी सुझाव मिल रहे हैं, उन पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि 14 अप्रैल तक सुझाव देने की जो आखिरी तारीख तय की गई है, उसे आगे बढ़ाया जा सकता है ताकि सभी को अपनी बात रखने का पूरा समय मिल सके।
लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं
कृष्णन के अनुसार मंत्रालय को इस मसौदे पर मिली प्रतिक्रियाएं एक जैसी नहीं हैं। कुछ लोग ज्यादा समय मांग रहे हैं, जबकि कुछ लोग इन नियमों को पूरी तरह वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
विवाद की वजह क्या है?
यह पूरा मामला सरकार द्वारा आईटी नियम, 2021 में प्रस्तावित बदलावों से जुड़ा है। इन बदलावों में कहा गया है कि अब समाचार और करंट अफेयर्स से जुड़ी सामग्री, जो इन्फ्लुएंसर या कंटेंट क्रिएटर जैसे आम यूजर्स पोस्ट करते हैं, उन्हें भी नियमों के दायरे में लाया जाएगा।
यूजर कंटेंट भी आएगा नियमों के तहत
सरल शब्दों में कहें तो अब आम लोगों द्वारा सोशल मीडिया पर डाली गई खबरनुमा या समसामयिक पोस्ट को भी उसी नियमों के तहत देखा जा सकता है, जो अभी केवल रजिस्टर्ड डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म पर लागू होते हैं। इससे नियमों के पार्ट-III का दायरा काफी बढ़ जाएगा।
30 मार्च को जारी हुआ था मसौदा
सरकार ने 30 मार्च को इन प्रस्तावित बदलावों का ड्राफ्ट जारी किया था। इसमें यह भी कहा गया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और अन्य इंटरमीडियरी को मंत्रालय द्वारा जारी स्पष्टीकरण, एडवाइजरी, एसओपी (SOP) और गाइडलाइंस का पालन करना अनिवार्य होगा।
14 अप्रैल तक मांगे गए थे सुझाव
मंत्रालय ने इन नियमों पर 14 अप्रैल 2026 तक सुझाव मांगे थे। बैठक के बाद कृष्णन ने बताया कि उद्योग और अन्य पक्षों से कई महत्वपूर्ण सुझाव मिले हैं, जिन पर अब विचार किया जाएगा।
उद्योग की मांग-सभी नियम एक जगह हों
बैठक में उद्योग जगत ने यह भी सुझाव दिया कि अलग-अलग दिशानिर्देशों को एक जगह समेकित किया जाए, ताकि नियम समझने और लागू करने में आसानी हो। कृष्णन ने इसे उचित मांग बताते हुए कहा कि मंत्रालय इस दिशा में भी संभावनाएं तलाशेगा।