🔔 ताज़ा ख़बरें सबसे पहले!

Samachar EiSamay की ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, खेल, मनोरंजन और बिज़नेस अपडेट अब सीधे आपके पास।

सिर्फ डायबिटिज ही नहीं इन 4 वजहों से भी शरीर में बनने लगता है इंसुलिन प्रतिरोध, कैसे दूर होगी यह समस्या?

ऐसा बिल्कुल नहीं है कि इंसुलिन रेजिस्टेंस केवल डायबिटीज होने पर ही होता है। यह समस्या मेटाबॉलिक डिसऑर्डर से भी जुड़ी होती है।

By Moumita Bhattacharya

Jun 06, 2026 01:04 IST

डायबिटिज (Diabetes) में या तो शरीर में इंसुलिन सही मात्रा में नहीं बनता है या इंसुलिन शुगर को कोशिकाओं तक पहुंचाने में अक्षम होता है। इस स्थिति को इंसुलिन रेजिस्टेंस कहा जाता है। लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है कि इंसुलिन रेजिस्टेंस केवल डायबिटीज होने पर ही होता है।

यह समस्या मेटाबॉलिक डिसऑर्डर से भी जुड़ी होती है। यहां तक कि शोध में माइग्रेनके साथ भी इंसुलिन रेजिस्टेंस का संबंध पाया गया है।

डायबिटीज के अलावा किन-किन शारीरिक परेशानियों में इंसुलिन रेजिस्टेंस हो सकता है और इन समस्याओं के कैसे निपटा जा सकता है? आइए जान लेते हैं : -

1. PCOS

जो महिलाएं पॉलिसिस्ट ओवरी सिंड्रोम यानी PCOS (Polycystic Ovary Syndrome) से प्रभावित हैं ऐसी लगभग 80% महिलाएं इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या से जूझती हैं। जब महिलाओं के शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस विकसित होता है तो यह ओवरी को प्रभावित करता है और शरीर में एंड्रोजन (पुरुष हार्मोन) का उत्पादन बढ़ने लगता है।

इसके कारण अनियमित पीरियड्स, वजन बढ़ना, मुंहासे, चेहरे पर बालों का उगना और प्रजनन से जुड़ी कई समस्याएं देखने को मिलती हैं।

Read Also | अचानक आंखों के सामने अंधकार, सिर घूमना, शरीर में कमजोरी – क्या किसी रोग का संकेत है?

2. माइग्रेन

विभिन्न शोधों में यह पाया गया है कि माइग्रेन (Migraine) के प्रमुख कारणों में इंसुलिन रेजिस्टेंस भी शामिल हो सकता है। जब ग्लूकोज का सही तरीके से मेटाबॉलिज्म नहीं होता, तो माइग्रेन की समस्या बढ़ सकती है और सिरदर्द अधिक तीव्र हो सकता है।

अध्ययनों से यह भी पता चला है कि जिन लोगों में इंसुलिन रेजिस्टेंस होता है उनमें बार-बार माइग्रेन की समस्या देखने को मिलती है। कई मामलों में रक्त में इंसुलिन का स्तर बढ़ने पर भी माइग्रेन ट्रिगर हो सकता है।

इंसुलिन रेजिस्टेंस होने का एक कारण फैटी लीवर भी हो सकता है Image : Ei Samay

3. फैटी लीवर

फैटी लीवर (Fatty Liver Disease) से प्रभावित लोगों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। विशेष रूप से नॉन-अल्कोहोलिक फैटी लीवर डिजीज के मामले अधिक देखने को मिल रहे हैं। इस स्थिति में लीवर में वसा (चर्बी) जमा होने लगती है और सूजन (इन्फ्लेमेशन) विकसित हो जाता है। ऐसे मामलों में भी शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या उत्पन्न हो सकती है।

4. ओबेसिटी

सिर्फ डायबिटीज और फैटी लिवर से ही इंसुलिन रेजिस्टेंस नहीं होता है। ओबेसिटी (Obesity) में भी यह समस्या देखी जाती है। जब शरीर में अत्यधिक चर्बी जमा हो जाती है तो इंसुलिन हार्मोन ठीक से काम नहीं कर पाता। ऐसी स्थिति में भी इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या उत्पन्न हो सकती है।

क्या है बचने के उपाय?

रक्तचाप बढ़ने या हार्ट डिजिज होने पर भी इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या देखी जा सकती है। इसके अलावा शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस बनने पर कई बार क्रॉनिक इंफ्लेमेशन (सूजन) भी होने लगता है। इसलिए इंसुलिन रेजिस्टेंस को नियंत्रित करना बहुत जरूरी है। इस स्थिति में संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और वजन नियंत्रण- ये सभी समान रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

Articles you may like: