पटना: बिहार विधान परिषद की नौ सीटों पर होने वाले चुनाव और एक सीट पर उपचुनाव को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में सीटों का बंटवारा लगभग तय हो गया है। भाजपा और जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के शीर्ष नेतृत्व के बीच सहमति बनने के बाद सीट शेयरिंग का फॉर्मूला सामने आया है।
जानकारी के मुताबिक, चुनाव होने वाली आठ सीटों में से पांच सीटों पर भाजपा और तीन सीटों पर जदयू अपने उम्मीदवार उतारेगी। हालांकि शुरुआती दौर में जदयू चार सीटों की मांग कर रही थी, लेकिन बाद में पार्टी तीन सीटों पर सहमत हो गई।
इसके बदले जदयू को एक बड़ा राजनीतिक फायदा मिला है। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे से खाली हुई विधान परिषद की सीट पर जदयू अपना उम्मीदवार उतारेगी। इस सीट का कार्यकाल वर्ष 2030 तक है, इसलिए इसे पार्टी के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विधान परिषद की कुल नौ सीटों में से आठ सीटों पर एनडीए के उम्मीदवार मैदान में उतरेंगे, जबकि एक सीट महागठबंधन के खाते में जाने की संभावना जताई जा रही है। वहीं उपचुनाव वाली सीट पर भी एनडीए अपना उम्मीदवार उतारेगा। ऐसे में गठबंधन परिषद में अपनी स्थिति और मजबूत करने की तैयारी में है।
एनडीए के भीतर छोटे सहयोगी दलों को प्रतिनिधित्व देने की पुरानी परंपरा भी इस बार जारी रह सकती है। सूत्रों के अनुसार भाजपा अपनी पांच सीटों में से एक सीट लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) और एक सीट राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) को दे सकती है। इस पर गठबंधन स्तर पर सहमति बन चुकी बताई जा रही है।
लोजपा (रामविलास) के पास विधानसभा में 19 विधायक हैं, इसलिए उसकी दावेदारी मजबूत मानी जा रही है। वहीं रालोमो को भी सीट मिलने की संभावना है। बताया जा रहा है कि विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा नेतृत्व ने रालोमो को प्रतिनिधित्व देने का आश्वासन दिया था।
दूसरी ओर हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) ने भी विधान परिषद की एक सीट की मांग की है, लेकिन मौजूदा सीटों के गणित में उसके लिए जगह बनती नहीं दिख रही है। ऐसे में पार्टी को अगले वर्ष तक इंतजार करना पड़ सकता है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विधानसभा चुनाव से पहले एनडीए ने सीटों के इस बंटवारे के जरिए गठबंधन में संतुलन बनाए रखने की कोशिश की है। अब सभी की नजर उम्मीदवारों की आधिकारिक घोषणा और नामांकन प्रक्रिया पर टिकी हुई है।