जयपुरः राजस्थान की एक राज्यसभा सीट पर फैसला ले पाना कांग्रेस के लिए आसान नहीं था। वर्तमान सांसद नीरज डांगी को दोबारा भेजे जाने का भी विरोध था। बावजूद इसके उनके नाम पर मुहर लगी और उच्च सदन में डांगी का जाना तय माना जा रहा है। इससे पहले, डांगी के विरोध में कांग्रेस के कुछ नेताओं ने दिल्ली में भी डेरा डाला। बीती रात (4 जून) ऐलान होने तक उठापटक जारी रही। मेवाड़-वागड़ के आदिवासी विधायक-नेताओं और जिलाध्यक्षों ने मांग करते हुए कहा कि उम्मीदवार दक्षिण राजस्थान से होना चाहिए। करीब 5 दशक से यह मांग उठती रही है, लेकिन एक बार फिर निराशा हाथ लगी।
1980 के बाद से नहीं मिला मौका
साल 2022 के राज्यसभा चुनाव के अलावा कई मौके पर खोड़निया इस बात को उठा चुके हैं। दरअसल, नीरज डांगी के विरोध में लामबंद नेताओं का कहना था कि इस बार दक्षिण राजस्थान से राज्यसभा में प्रतिनिधित्व होना चाहिए। उदयपुर संभाग से आखिरी बार धूलेश्वर मीणा को मौका दिया गया था। साल 1980 में धूलेश्वर मीणा को उच्च सदन में भेजा गया।
46 वर्षों से उदयपुर संभाग की उपेक्षा
चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, उदयपुर शहर, बांसवाड़ा और सलूम्बर के जिला अध्यक्षों ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को संयुक्त पत्र लिखा। इस पत्र पर एआईसीसी सदस्य दिनेश खोड़निया ने भी साइन किए। उन्होंने कहा कि राज्यसभा में 46 वर्षों से उदयपुर संभाग की उपेक्षा की गई है। पिछले 46 वर्षों से उदयपुर संभाग के किसी कांग्रेस कार्यकर्ता को राज्यसभा में जाने को अवसर कांग्रेस ने नहीं दिया। जबकि ये संभाग कांग्रेस पार्टी का गढ़ रहा है।
कांग्रेस नेताओं की ओर से कहा गया कि राजस्थान से 10 राज्यसभा सदस्य चुने जाते हैं और कई बार 10 में से 8 सदस्य कांग्रेस के चुने गए। बावजूद इसके उदयपुर संभाग से मौका नहीं मिला। अक्सर ही मारवाड़ और शेखावाटी क्षेत्र के अलावा प्रदेश के बाहर के नेताओं को मौका दिया जाता है।
सोशल इंजीनियरिंग में पीछे रही कांग्रेस
सभी जिला अध्यक्षों ने बीएपी की तरफ इशारा करते हुए कहा कि संभाग में तीसरी पार्टी के उदय के बाद वोटों का बंटवारा होने से कांग्रेस को भारी नुकसान हुआ है। बीजेपी ने सामान्य और जनजाति वर्ग के कार्यकर्ता को राज्यसभा और बोर्ड-निगम में मौका देकर वोटबैंक को साध लिया है। लेकिन कांग्रेस पार्टी पिछले 46 वर्षों से सोशल इंजीनियरिंग में पीछे रही, जिससे कांग्रेस का जनाधार कम हुआ है।
दिनेश खोड़निया और सीपी जोशी भी थे दावेदार
दरअसल, राज्यसभा में नीरज डांगी के अलावा पवन खेड़ा का नाम भी चर्चा में था। खेड़ा को कर्नाटक से उम्मीदवार बनाया गया। इसके अलावा दक्षिण राजस्थान से डॉ. सीपी जोशी और दिनेश खोड़निया भी दावेदार थे। खोड़निया ने पुरजोर तरीके से आलाकमान तक अपनी बात पहुंचाई और राज्यसभा सीट पर सामान्य वर्ग की भागीदारी की वकालत की।