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गर्मी से राहत लेकर आई प्री-मॉनसून बारिश, लेकिन तेज हवाओं और वज्रपात ने बढ़ाई चिंता

कोलकाता समेत दक्षिण बंगाल के कई जिलों में मौसम ने अचानक करवट ली है। तापमान में गिरावट आई है, लेकिन मौसम विभाग ने आंधी, बिजली और तेज बारिश को लेकर चेतावनी भी जारी की है।

By श्वेता सिंह

Jun 05, 2026 10:54 IST

कोलकाताः पिछले कई दिनों से दक्षिण बंगाल भीषण उमस और गर्मी की चपेट में था। लोगों का दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा था और तापमान के साथ नमी का स्तर भी लगातार असहज स्थिति पैदा कर रहा था। ऐसे माहौल में शुक्रवार सुबह हुई बारिश ने मौसम को पूरी तरह बदल दिया।

कोलकाता और आसपास के जिलों में तड़के हुई बारिश से तापमान में गिरावट दर्ज की गई। मौसम विभाग का अनुमान है कि इस बारिश के कारण कई जिलों में तापमान 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक कम हो सकता है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह राहत फिलहाल प्री-मॉनसून गतिविधियों का परिणाम है और मॉनसून के पूरी तरह सक्रिय होने तक मौसम में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। यह बारिश गर्मी से तत्काल राहत तो दे रही है, लेकिन यह संकेत भी है कि बंगाल मॉनसून पूर्व संक्रमण काल में प्रवेश कर चुका है, जहां मौसम तेजी से बदलता है और चरम घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है।

राहत के साथ जोखिम भी, सॉल्ट लेक की घटना बनी चेतावनी

बारिश के साथ आई तेज हवाओं ने मौसम के दूसरे पहलू को भी सामने ला दिया। कोलकाता के सॉल्ट लेक इलाके में एक पेड़ गिरने से एक राहगीर घायल हो गया। यह घटना बताती है कि प्री-मानसून आंधियां केवल राहत नहीं लातीं, बल्कि शहरी क्षेत्रों में जोखिम भी पैदा करती हैं।

मौसम विभाग ने कोलकाता के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। शहर में हल्की से मध्यम बारिश के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना जताई गई है। प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने और खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है।

कोलकाता जैसे घनी आबादी वाले शहरों में पुराने पेड़, कमजोर संरचनाएं और खुले विद्युत तार आंधी-तूफान के दौरान अतिरिक्त खतरा पैदा करते हैं। इसलिए मौसम संबंधी चेतावनियां केवल औपचारिक सूचना नहीं बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

आठ जिलों में ऑरेंज अलर्ट, क्यों बढ़ी चिंता?

अलीपुर मौसम विभाग ने दक्षिण बंगाल के आठ जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इनमें कोलकाता, हावड़ा, हुगली, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, पूर्व मेदिनीपुर, बीरभूम, मुर्शिदाबाद और नदिया शामिल हैं।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार शुक्रवार और रविवार को मौसम सबसे अधिक सक्रिय रहने की संभावना है। इन जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश, लगातार वज्रपात और 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।

शनिवार को बारिश की तीव्रता कुछ कम रहने का अनुमान है, लेकिन समग्र रूप से सप्ताहांत के दौरान मौसम अस्थिर बना रहेगा। ऑरेंज अलर्ट का मतलब केवल बारिश नहीं बल्कि संभावित नुकसान की आशंका भी है। खेती, परिवहन और दैनिक गतिविधियों पर इसका प्रभाव पड़ सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में वज्रपात का खतरा विशेष चिंता का विषय बना हुआ है।

उत्तर बंगाल से लेकर मानसून की दस्तक तक, आगे क्या?

दक्षिण बंगाल के साथ-साथ उत्तर बंगाल में भी प्री-मॉनसून गतिविधियां तेज हो गई हैं। दार्जिलिंग, कालिम्पोंग, अलीपुरद्वार, जलपाईगुड़ी और कूचबिहार के कई हिस्सों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है। वहां भी तेज हवाओं और बिजली गिरने के खतरे को देखते हुए चेतावनी जारी की गई है।

इसी बीच देश में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की प्रगति ने मौसम वैज्ञानिकों की उम्मीदें बढ़ा दी हैं। 4 जून को मॉनसून केरल पहुंच चुका है और अब यह लक्षद्वीप तथा तमिलनाडु के कुछ हिस्सों तक फैल गया है। इससे पूर्वी भारत में मॉनसून की आगे की प्रगति को गति मिलने की संभावना है।

बंगाल में मौजूदा मौसम संकेत दे रहे हैं कि मॉनसून का रास्ता तैयार हो रहा है। यदि मॉनसून की प्रगति सामान्य रहती है, तो अगले कुछ सप्ताह में राज्य को स्थायी राहत मिल सकती है। फिलहाल प्री-मॉनसून बारिश गर्मी को कम कर रही है, लेकिन इसके साथ आने वाले मौसमीय जोखिमों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

दक्षिण बंगाल में हुई बारिश ने गर्मी से जूझ रहे लोगों को राहत जरूर दी है, लेकिन मौसम विभाग की चेतावनियां बताती हैं कि आने वाले दिनों में सतर्कता बनाए रखना जरूरी होगा। एक ओर तापमान में गिरावट लोगों के लिए राहत लेकर आई है, वहीं दूसरी ओर तेज हवाएं, वज्रपात और भारी बारिश प्रशासन और नागरिकों दोनों के लिए चुनौती बन सकती हैं।

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