चुंचुड़ाः चुंचुड़ा के पूर्व तृणमूल कांग्रेस विधायक असित मजूमदार की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रहीं। सड़क जाम और पुलिस कार्य में बाधा पहुंचाने से जुड़े मामले में जमानत मिलने के बावजूद उन्हें जेल में ही रहना होगा। कारण यह है कि उनके खिलाफ दर्ज एक नए रंगदारी मामले में अदालत ने जमानत देने से इनकार कर दिया है।
बुधवार को चुंचुड़ा अदालत में हुई सुनवाई के दौरान असित मजूमदार की जमानत याचिका खारिज कर दी गई। इसी मामले में नामजद चुंचुड़ा नगर पालिका के उपाध्यक्ष पार्थ साहा और तृणमूल कार्यकर्ता मिर्जा सानोवार अली को भी अदालत से राहत नहीं मिली।
मामले की शुरुआत 30 मई को हुई राजनीतिक घटनाओं से जुड़ी है। उस दिन सोनारपुर में तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन के बाद राज्य के विभिन्न हिस्सों में पार्टी समर्थकों ने प्रदर्शन किया था। चुंचुड़ा में असित मजूमदार के नेतृत्व में पिपुलपाती मोड़ पर सड़क अवरोध कर विरोध जताया गया।
इसके बाद पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज किया। आरोप लगाया गया कि प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक मार्ग अवरुद्ध किया गया, पुलिस के कार्य में बाधा पहुंचाई गई और कानून-व्यवस्था प्रभावित हुई।
31 मई को पुलिस ने असित मजूमदार, पार्थ साहा सहित कुल 10 लोगों को गिरफ्तार किया। अदालत में पेशी के बाद पांच लोगों को पुलिस हिरासत और पांच को न्यायिक हिरासत में भेजा गया। असित मजूमदार को न्यायिक हिरासत में भेजा गया था और वह फिलहाल हुगली सुधार गृह में बंद हैं।
सुनवाई के दौरान आरोपियों की ओर से अधिवक्ता निर्माल्य चक्रवर्ती ने पक्ष रखा। अदालत ने सड़क अवरोध और पुलिस कार्य में बाधा पहुंचाने वाले मामले में शेष आठ आरोपियों को जमानत दे दी, लेकिन असित मजूमदार की रिहाई का रास्ता नए रंगदारी मामले के कारण बंद हो गया।
जांच के दौरान पुलिस ने असित मजूमदार को रंगदारी के एक अलग मामले में भी आरोपित बनाया है। इसी मामले में पार्थ साहा और मिर्जा सानोवार अली के नाम भी शामिल किए गए हैं। अदालत ने तीनों की जमानत याचिका खारिज कर दी।
अदालती सूत्रों के अनुसार, असित मजूमदार को शुक्रवार को फिर अदालत में पेश किया जाएगा। वहीं पार्थ साहा और मिर्जा सानोवार अली की अगली पेशी शनिवार को हो सकती है। नए मामले के सामने आने के बाद पूर्व विधायक की कानूनी चुनौतियां और बढ़ गई हैं।