शिलांगः शिलांग में आयोजित पूर्वोत्तर परिषद (एनईसी) की 73वीं पूर्ण बैठक की अध्यक्षता करते हुए केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि पूर्वोत्तर अब संघर्ष की छवि से आगे बढ़कर देश का प्रमुख निवेश और विकास केंद्र बन रहा है। उन्होंने क्षेत्र को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा एनालिटिक्स, मशीन लर्निंग, ब्लॉकचेन और आईटी सेक्टर का बड़ा हब बनाने की दिशा में काम करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
बैठक में केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, मेघालय के राज्यपाल सी.एच. विजयशंकर, मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा, केंद्रीय राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार, गृह सचिव गोविंद मोहन और अन्य वरिष्ठ अधिकारी तथा सभी पूर्वोत्तर राज्यों के राज्यपाल और मुख्यमंत्री मौजूद रहे।
12 वर्षों में विकास और शांति पर जोर
अमित शाह ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूर्वोत्तर के विकास को नई गति मिली है। उन्होंने दावा किया कि इस अवधि में कानून-व्यवस्था में सुधार हुआ, शांति स्थापित हुई और विकास परियोजनाओं को तेजी से लागू किया गया।
उन्होंने बताया कि 12 से अधिक शांति समझौतों के जरिए 10,800 से अधिक युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ा गया है, जिससे क्षेत्र में उग्रवाद में उल्लेखनीय कमी आई है। शाह के अनुसार सड़क, रेल और हवाई संपर्क में सुधार से पूर्वोत्तर और देश के अन्य हिस्सों के बीच दूरी कम हुई है और भावनात्मक जुड़ाव भी मजबूत हुआ है।
निवेश, उद्योग और आधारभूत ढांचे पर फोकस
बैठक में औद्योगिक विकास और निवेश पर विस्तृत चर्चा हुई। अमित शाह ने बताया कि ‘राइजिंग नॉर्थ ईस्ट इन्वेस्टमेंट समिट’ के माध्यम से लगभग 4.25 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।
उन्होंने असम में लगभग 27,000 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे सेमीकंडक्टर संयंत्र, क्षेत्रीय स्वास्थ्य हब के विकास और नमरूप अमोनिया-यूरिया कॉम्प्लेक्स जैसी परियोजनाओं को विकास का आधार बताया। साथ ही उन्होंने गुवाहाटी, इम्फाल और अगरतला को मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स हब के रूप में विकसित करने और सिंगल विंडो क्लीयरेंस व्यवस्था को प्रभावी बनाने पर जोर दिया।
कृषि, ऊर्जा, तकनीक और भविष्य का रोडमैप
अमित शाह ने कहा कि पूर्वोत्तर को मछली, अंडा और दूध उत्पादन में आत्मनिर्भर बनना चाहिए। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) अगले वित्त वर्ष से हर साल 50,000 से अधिक दुग्ध पशु उपलब्ध कराने की योजना पर काम करेगा।
उन्होंने क्षेत्र को जलविद्युत, सौर ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधनों के बड़े केंद्र के रूप में बताया। साथ ही डेटा सेंटर, आईटी उद्योग और तकनीक आधारित अर्थव्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। शाह ने पूर्वोत्तर परिषद को केवल वित्त वितरण संस्था नहीं, बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक विकास संस्थान के रूप में विकसित करने की बात कही।
उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र के लगभग 215 उत्पादों को भौगोलिक संकेतक (GI) टैग मिलने की क्षमता है, जिसके लिए राज्यों को विशेष टास्क फोर्स बनाकर प्रक्रिया तेज करनी चाहिए। साथ ही पूर्वोत्तर को स्वास्थ्य पर्यटन और वेलनेस हब के रूप में विकसित करने की दिशा में काम करने का आह्वान किया।