कोलंबोःश्रीलंका के एक वृद्ध देखभाल केंद्र में लगी भीषण आग में कम से कम 12 लोगों की मौत हो गई, जबकि सात अन्य घायल हो गए। पुलिस के अनुसार घटना के बाद संस्थान के संचालक को गिरफ्तार कर लिया गया है और अदालत ने उसे 11 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। यह हादसा बुधवार शाम करीब 5:30 बजे कालुतारा जिले के अंगुरुवाटोटा क्षेत्र स्थित वृद्धाश्रम सेनेहासे कडल्ला मवुपिया सावाना (स्नेह का घोंसला) में हुआ। यह स्थान राजधानी कोलंबो से लगभग 65 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित है।
मृतकों और घायलों की संख्या
पुलिस के मुताबिक आग लगने के बाद घटनास्थल से 10 लोगों के शव बरामद किए गए। दो अन्य लोगों ने होराना बेस अस्पताल में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। सात घायल अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं। आग लगने के समय केंद्र में 70 से अधिक बुजुर्ग रह रहे थे। स्थानीय निवासियों और पुलिस की मदद से आग पर काबू पाया गया।
51 लोगों को सुरक्षित निकाला गया
अधिकारियों ने बताया कि कुल 51 निवासियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। उन्हें अस्थायी रूप से नजदीकी एक विद्यालय में ठहराया गया है। पुलिस का कहना है कि हाल के वर्षों में श्रीलंका में आग लगने से हुई मौतों की यह सबसे गंभीर घटनाओं में से एक है।
मजिस्ट्रेट जांच में सामने आए तथ्य
होराना की मजिस्ट्रेट लक्षमिनी विदानागामागे की मौजूदगी में घटनास्थल की जांच की गई। पुलिस ने बताया कि मलबे से कई जले हुए शव बरामद किए गए, जिनमें एक बिल्ली का शव भी शामिल था। प्रारंभिक रिपोर्टों में गैस सिलेंडर विस्फोट को आग के तेजी से फैलने का संभावित कारण बताया गया था, लेकिन अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि आग लगने के वास्तविक कारण का अभी पता नहीं चल पाया है।
संचालक गिरफ्तार, पंजीकरण पर भी सवाल
38 वर्षीय इसुरु अनुश्का परेरा, जो निजी तौर पर संचालित इस केंद्र के मालिक हैं, को गुरुवार को गिरफ्तार किया गया। मजिस्ट्रेट जांच के बाद अदालत ने उन्हें 11 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, यह वृद्धाश्रम संबंधित सरकारी नियामक संस्था में पंजीकृत नहीं था और लाभ कमाने के उद्देश्य से संचालित किया जा रहा था।
मानसिक रूप से बीमार लोगों को भी रखा गया था
बताया गया है कि केंद्र में बुजुर्गों के साथ कुछ मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोगों को भी रखा गया था। प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि मानसिक रूप से अस्वस्थ कुछ निवासियों को जंजीरों से बांधकर रखा जाता था। एक पीड़ित के परिजन ने बताया कि प्रवेश के समय 75,000 श्रीलंकाई रुपये यानी करीब 225 अमेरिकी डॉलर जमा कराने पड़ते थे, बाद में मासिक शुल्क भी लिया जाता था।
एक अन्य परिजन ने आरोप लगाया कि उनकी बेटी को जंजीरों से बांधकर रखा गया था। उन्होंने कहा कि वह हर महीने 35,000 श्रीलंकाई रुपये का भुगतान करते थे लेकिन आग लगने के दौरान उनकी बेटी को बचाया नहीं जा सका क्योंकि वह बंधी हुई थी।
जांच जारी
पुलिस और संबंधित एजेंसियां आग लगने के कारणों की जांच कर रही हैं। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि वृद्धाश्रम के संचालन में सुरक्षा और नियामकीय मानकों का पालन किया गया था या नहीं।