इस्लामाबाद/नई दिल्ली: यूरोपीय संघ (EU) के साथ हुई हालिया रणनीतिक वार्ता के बाद पाकिस्तान के बयान ने एक नया कूटनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। पाकिस्तान ने दावा किया है कि EU प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत में भारत से जुड़े मानवाधिकार मुद्दे पर चर्चा की गई।
पाकिस्तान विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि यूरोपीय संघ के साथ हुई वार्ता के दौरान भारत में मानवाधिकार स्थिति का मुद्दा भी सामने रखा गया। उन्होंने यह भी दोहराया कि पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे के समाधान के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के अनुसार पक्षधर है।
यह बयान उस उच्चस्तरीय बातचीत के बाद सामने आया, जिसमें यूरोपीय संघ की विदेश मामलों और सुरक्षा नीति की प्रमुख काजा कालास ने पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री इशाक डार से मुलाकात की थी। इसी मुलाकात के बाद पाकिस्तान-ईयू की 8वीं रणनीतिक वार्ता आयोजित की गई।
इस पूरे घटनाक्रम पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। भारत ने पाकिस्तान और यूरोपीय संघ के संयुक्त बयान में जम्मू-कश्मीर का उल्लेख किए जाने को अस्वीकार करते हुए स्पष्ट किया कि यह क्षेत्र देश का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि जिनका इस मुद्दे पर कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है, उन्हें इस पर टिप्पणी करने से बचना चाहिए। भारत ने यह भी साफ किया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख पर किसी भी प्रकार की बाहरी टिप्पणी स्वीकार्य नहीं है।