नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) की उस याचिका को निष्प्रभावी मानते हुए निपटा दिया है, जिसमें पहलवान विनेश फोगाट को चयन ट्रायल में भाग लेने की अनुमति देने वाले दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी। अदालत ने कहा कि बाद में हुए घटनाक्रमों के कारण इस मामले पर आगे विचार की आवश्यकता नहीं रह गई है।
न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार की पीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि वह हाईकोर्ट के आदेश में की गई किसी भी टिप्पणी या निष्कर्ष पर कोई राय नहीं दे रही है। साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि उसके इस फैसले को हाईकोर्ट की टिप्पणियों की पुष्टि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
सुनवाई के दौरान डब्ल्यूएफआई की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डी. एन. गोदभूर्न ने दलील दी कि विनेश फोगाट को चयन ट्रायल में भाग लेने का मौका मिला था, लेकिन वह उसमें सफल नहीं हो सकीं। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रायल के दौरान कुछ विवाद की स्थिति बनी।
इस पर पीठ ने कहा कि अब पूरा मामला अप्रासंगिक हो चुका है, इसलिए इस याचिका पर आगे सुनवाई की जरूरत नहीं है। अदालत ने सभी कानूनी प्रश्नों को खुला रखते हुए मामले का निपटारा कर दिया।
वकील ने यह भी आग्रह किया कि हाईकोर्ट ने कुश्ती महासंघ के फैसलों पर कुछ टिप्पणियां की थीं, जिनमें उन्हें “दुर्भावनापूर्ण” और “निंदनीय” बताया गया था, और उन पर भी विचार किया जाए। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस विषय पर कोई टिप्पणी नहीं की।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 29 मई को विनेश फोगाट को 30 और 31 मई को होने वाले एशियाई खेल 2026 के चयन ट्रायल में भाग लेने की अनुमति दी थी। इससे पहले 22 मई के दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को डब्ल्यूएफआई ने चुनौती दी थी।