नयी दिल्लीः भारत और अमेरिका के बीच चल रहे अंतरिम व्यापार समझौते (बीटीए) के पहले चरण को लेकर बातचीत अब तेजी पकड़ रही है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने संकेत दिया है कि दोनों देश अगले महीने के मध्य तक इस समझौते के पहले हिस्से को लागू करने की स्थिति में पहुंच सकते हैं।
उन्होंने इसे व्यापार संबंधों में एक महत्वपूर्ण और “सक्रिय” कदम बताया, जो आगे की व्यापक व्यापार डील की दिशा तय करेगा।
दिल्ली में हुई अहम वार्ता
हाल ही में 2 से 4 जून के बीच अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली में भारतीय अधिकारियों के साथ विस्तृत बातचीत की। इस बैठक में व्यापार समझौते से जुड़े कई अहम विषयों पर चर्चा हुई।
इनमें वस्तु व्यापार, सीमा शुल्क व्यवस्था, गैर-टैरिफ बाधाएं, व्यापार सुगमता और आर्थिक सुरक्षा जैसे मुद्दे शामिल रहे।
अमेरिकी पक्ष का नेतृत्व मुख्य वार्ताकार ब्रेंडन लिंच ने किया, जबकि भारत की ओर से अतिरिक्त सचिव दर्पण जैन ने बातचीत संभाली। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भी इस प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की।
टैरिफ ढांचे में बदलाव से नई स्थिति
इस व्यापार समझौते की दिशा पर वैश्विक टैरिफ नीतियों में आए बदलाव का असर पड़ा है। फरवरी में दोनों देशों ने एक रूपरेखा पर सहमति जताई थी, लेकिन बाद में अमेरिका में नीतिगत और न्यायिक बदलावों के कारण टैरिफ ढांचे में संशोधन की स्थिति बनी।
अब सभी देशों पर समान 10 प्रतिशत टैरिफ लागू होने के बाद समझौते को नए हालात के अनुसार फिर से संतुलित करने की जरूरत पड़ रही है।
व्यापार रणनीति और आर्थिक हित
भारत और अमेरिका दोनों इस समझौते को रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से आगे बढ़ा रहे हैं। भारत ने कई औद्योगिक और कृषि उत्पादों पर शुल्क कम करने का प्रस्ताव दिया है, जबकि अमेरिका से ऊर्जा, विमानन और तकनीकी उत्पादों की खरीद बढ़ाने की योजना है। भारत ने अगले पांच वर्षों में अमेरिकी ऊर्जा, विमान और तकनीक उत्पादों की बड़ी खरीद की मंशा भी जताई है।
वहीं, अमेरिका की ओर से कुछ देशों पर संभावित टैरिफ और जांच संबंधी कदमों के कारण बातचीत पर अतिरिक्त दबाव बना हुआ है।
व्यापार आंकड़े और मौजूदा स्थिति
वित्तीय वर्ष 2025–26 में अमेरिका भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापार साझेदार रहा। भारत का निर्यात 87.3 अरब डॉलर और आयात 52.9 अरब डॉलर रहा। हालांकि व्यापार अधिशेष घटकर 34.4 अरब डॉलर पर आ गया, जो पिछले वर्ष 40.89 अरब डॉलर था। यह बदलाव दोनों देशों के बीच बदलते व्यापार संतुलन और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों को दर्शाता है।
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते का पहला चरण अब लगभग अंतिम रूप लेने की स्थिति में है। हालांकि वैश्विक टैरिफ नीतियों और बदलते आर्थिक हालात इस समझौते की गति और दिशा दोनों को प्रभावित कर सकते हैं। आने वाला समय इस व्यापार साझेदारी के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।