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कोलकाता में महिलाओं की मुफ्त बस सुविधा से ऐप कैब इंडस्ट्री में संकट !

महिलाओं की मुफ्त बस सेवा से बदली यात्रा की आदतें, ऐप कैब चालकों में चिंता।

By श्वेता सिंह

Jun 05, 2026 18:26 IST

कोलकाताः पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा कोलकाता में 1 जून 2026 से महिलाओं के लिए सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा सुविधा लागू किए जाने के बाद शहर के परिवहन ढांचे में बदलाव के संकेत दिखने लगे हैं।

इस योजना के तहत राज्य की सभी सरकारी बसों-सामान्य और वातानुकूलित (एसी) में महिलाओं से कोई किराया नहीं लिया जा रहा है। इससे रोजमर्रा की यात्रा करने वाली महिलाओं के लिए बस यात्रा एक सीधा और बिना खर्च वाला विकल्प बन गई है।

शहर में लंबे समय से यह देखा जाता रहा है कि छोटी और मध्यम दूरी के लिए महिलाएं सुविधा और सुरक्षा के कारण ऐप कैब का उपयोग करती थीं, लेकिन अब मुफ्त बस सेवा ने एक मजबूत विकल्प खड़ा कर दिया है।

महिलाओं के यात्रा व्यवहार में बदलाव

मुफ्त बस सुविधा लागू होने के बाद महिलाओं के यात्रा व्यवहार में धीरे-धीरे बदलाव दिखने लगा है। नौकरीपेशा महिलाएं, कॉलेज छात्राएं और घरेलू कामकाजी महिलाएं अब छोटी दूरी की यात्रा के लिए बस को अधिक व्यवहारिक विकल्प मान रही हैं।

पहले जहां समय बचाने और सुविधा के लिए ऐप कैब को प्राथमिकता दी जाती थी, वहीं अब लागत रहित यात्रा ने लोगों की प्राथमिकता को प्रभावित करना शुरू कर दिया है।

हालांकि शुरुआती चरण में यह बदलाव बहुत बड़ा नहीं दिख रहा है, लेकिन परिवहन विशेषज्ञ इसे धीरे-धीरे बढ़ने वाला ट्रेंड मान रहे हैं।

ऐप कैब सेक्टर पर आर्थिक दबाव

कोलकाता में वर्तमान में लगभग 20 से 22 हजार ऐप कैब सक्रिय हैं, जो प्रतिदिन करीब 1.5 लाख यात्रियों को सेवा देते हैं। इस सेक्टर में महिलाओं की भी अच्छी हिस्सेदारी रही है, क्योंकि वे सुरक्षा और सुविधा के कारण इस सेवा को प्राथमिकता देती थीं।

लेकिन अब स्थिति बदलती दिख रही है। मुफ्त बस सेवा के कारण लागत का अंतर बहुत बड़ा हो गया है। जहां ऐप कैब में दूरी और समय के अनुसार किराया देना पड़ता है, वहीं बस यात्रा पूरी तरह मुफ्त है।

इस वजह से आशंका जताई जा रही है कि महिलाओं का एक हिस्सा ऐप कैब से हटकर बसों की ओर जा सकता है, जिससे कैब की बुकिंग और सवारी संख्या पर असर पड़ सकता है।

पहले से दबाव में चल रहा कैब उद्योग

ऑनलाइन कैब ऑपरेटर्स गिल्ड के महासचिव इंद्रनील बंद्योपाध्याय के अनुसार, पिछले कुछ समय में ईंधन की कीमतों में कई चरणों में बढ़ोतरी हुई है, जबकि किराया संरचना में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

इस स्थिति के कारण ड्राइवरों की आय पहले ही घट रही थी। अब यदि यात्रियों का बड़ा हिस्सा सरकारी बसों की ओर शिफ्ट होता है, तो यह दबाव और बढ़ सकता है।

ड्राइवरों का कहना है कि सवारी कम होने पर उनकी दैनिक कमाई प्रभावित होगी, जिससे उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ सकता है।

पूरे ट्रांसपोर्ट सिस्टम पर संभावित असर

परिवहन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह रुझान लगातार बढ़ता रहा तो इसका असर केवल ऐप कैब तक सीमित नहीं रहेगा। निजी बस, मिनीबस और अन्य भुगतान आधारित सार्वजनिक परिवहन सेवाओं की सवारी में भी गिरावट देखी जा सकती है।

इससे शहर के परिवहन ढांचे में धीरे-धीरे पुनर्संतुलन की स्थिति बन सकती है, जहां सार्वजनिक परिवहन की भूमिका और मजबूत होगी और निजी परिवहन सेवाओं को अपने संचालन मॉडल में बदलाव करना पड़ सकता है।

भविष्य की दिशा और निष्कर्ष

महिलाओं के लिए मुफ्त बस सेवा को एक महत्वपूर्ण सामाजिक और आर्थिक पहल के रूप में देखा जा रहा है, जिसने यात्रा को अधिक सुलभ और किफायती बनाया है।

लेकिन इसके साथ ही यह कदम शहरी निजी परिवहन सेक्टर के लिए नई चुनौती भी लेकर आया है। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि यह नीति कोलकाता के ट्रांसपोर्ट सिस्टम को किस दिशा में ले जाती है और यात्रियों की आदतों पर इसका कितना स्थायी प्रभाव पड़ता है।

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