नई दिल्लीः केंद्र सरकार ने रक्षा बलों की वित्तीय शक्तियों में बड़ा बदलाव करते हुए उन्हें पहले से काफी बढ़ा दिया है। इस फैसले के तहत अब सेना, नौसेना और वायुसेना के शीर्ष अधिकारी और कमांडर पहले की तुलना में कहीं अधिक स्वतंत्रता के साथ खर्च कर सकेंगे। इसका उद्देश्य रक्षा खरीद और जरूरी परियोजनाओं को तेज करना और निर्णय प्रक्रिया में देरी को कम करना है।
सरकार ने इस नए ढांचे को डेलीगेशन ऑफ फाइनेंशियल पावर्स फॉर डिफेंस सर्विसेज (DFPDS-2026) नाम दिया है। इसके तहत वित्तीय शक्तियों में 100 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की गई है। कई मामलों में यह सीमा पहले से लगभग दोगुनी हो गई है।
नए नियमों के अनुसार, अब तीनों सेनाओं—थल सेना, नौसेना और वायुसेना—के प्रमुख यानी सर्विस चीफ्स को 125 करोड़ रुपये तक खर्च करने की अनुमति होगी। पहले यह सीमा 75 करोड़ रुपये थी। इस बदलाव से वे किसी भी जरूरी रक्षा परियोजना या खरीद के लिए पहले की तुलना में तेजी से निर्णय ले सकेंगे और लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया से बचा जा सकेगा।
इसी तरह, फील्ड स्तर पर काम करने वाले आर्मी कमांडरों और उनके समकक्ष नौसेना और वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों की वित्तीय शक्ति भी काफी बढ़ा दी गई है। पहले इन अधिकारियों के पास 30 करोड़ रुपये तक खर्च करने की अनुमति थी, जिसे अब बढ़ाकर 100 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इससे स्थानीय स्तर पर चल रही परियोजनाओं और जरूरतों को तुरंत पूरा करने में मदद मिलेगी और निर्णय लेने के लिए दिल्ली पर निर्भरता कम होगी।
सरकार का मानना है कि इस बदलाव से रक्षा क्षेत्र में चल रहे करीब 1.25 लाख करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स को तेजी से आगे बढ़ाया जा सकेगा। लंबे समय से अटके या धीमी गति से चल रहे कई रक्षा कार्यों को अब गति मिलने की उम्मीद है।
इसके अलावा, इमरजेंसी खरीद व्यवस्था में भी महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं। अब सैन्य कमांडरों को आपातकालीन परिस्थितियों में जरूरी हथियार और उपकरण खरीदने के लिए पहले से अधिक बजट उपलब्ध होगा। इस श्रेणी में खर्च की सीमा को दोगुना कर दिया गया है, जिससे किसी भी संकट या युद्ध जैसी स्थिति में सेना तुरंत जरूरी संसाधन जुटा सकेगी।
नए नियमों में रिसर्च और स्वदेशी उत्पादन को भी विशेष प्रोत्साहन दिया गया है। रक्षा अनुसंधान और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े प्रोजेक्ट्स के लिए बजट आवंटन को बढ़ाया गया है। इससे आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी मजबूती मिलेगी और देश में बनने वाले रक्षा उपकरणों को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स के लिए भी रक्षा क्षेत्र में अवसर बढ़ेंगे।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, बदलते सुरक्षा हालात और सेना के बढ़ते दायित्वों को देखते हुए यह सुधार जरूरी था। पुराने वित्तीय नियम 2021 में बनाए गए थे, लेकिन मौजूदा जरूरतों के हिसाब से उनमें बदलाव की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। नया ढांचा अक्टूबर 2025 में जारी किए गए डिफेंस प्रोक्योरमेंट मैनुअल के साथ मिलकर काम करेगा।
कुल मिलाकर, इस फैसले से उम्मीद है कि सेना की ऑपरेशनल तैयारी मजबूत होगी, खरीद प्रक्रिया तेज होगी और आधुनिक हथियारों व तकनीक के लिए निर्णय लेने में तेजी आएगी।