नई दिल्ली : भारत और ओमान के बीच व्यापार समझौता अब प्रभावी हो गया है, जिससे निर्यातकों को बड़ा लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते से भारत के निर्यात क्षेत्र को नई गति मिलेगी। इस राज्य से भी उत्पादों के निर्यात में वृद्धि की उम्मीद जताई जा रही है।
दोनो देशों के इस समझौते के चलते इस राज्य के निर्यातकों को भी फायदा होगा। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से जारी की गई सूची के अनुसार जिन उत्पादों को इस समझौते के दायरे में शामिल किया गया है, उनमें दार्जिलिंग चाय, कोलकाता के चमड़े से बने उत्पाद, हावड़ा के इंजीनियरिंग सामान, जूट उत्पाद, मालदा के आम, प्रसंस्कृत समुद्री खाद्य उत्पाद तथा हस्तकरघा (हैंडलूम) उत्पाद शामिल हैं। इसका अर्थ है कि इस राज्य से उपरोक्त उत्पादों का निर्यात बढ़ने की संभावना है। स्वाभाविक रूप से इन उद्योगों से जुड़े संगठनों और कृषि उत्पादों के मामले में किसानों को लाभ होगा।
उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष दिसंबर में ओमान की राजधानी मस्कट में दोनों देशों ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। भारत और ओमान द्वारा अपने-अपने आंतरिक प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाएँ पूरी करने के बाद यह समझौता 1 जून से आधिकारिक रूप से प्रभावी हो गया है।
इस दिन को स्मरणीय बनाने के लिए मुंबई, कोलकाता और चेन्नई से कृषि उत्पादों, रत्नों एवं आभूषणों सहित विभिन्न वस्तुओं की लगभग 10 खेप विशेष शुल्क के साथ ओमान भेजी गईं। संबंधित क्षेत्रों के अनुसार यह केवल एक प्रतीकात्मक कदम नहीं है, बल्कि दोनों देशों के आर्थिक सहयोग के नए अध्याय की शुरुआत का संकेत है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते से भारत के श्रम-प्रधान और निर्यात-उन्मुख उद्योगों को सबसे अधिक लाभ मिलेगा।