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बगैर खाना-पानी के व ऑक्सीजन के एवरेस्ट पर जिंदा रहा, मरा समझकर होने वाला था उसका अंतिम संस्कार

52 वर्षीय शेरपा गाइड दावा 'हिलेरी' माउंट एवरेस्ट पर बिना खाना-पानी और ऑक्सीजन के 6 दिन तक जीवित रहे। परिवार ने उन्हें मृत मान लिया था।

By लखन भारती

Jun 05, 2026 13:20 IST

नयी दिल्लीः माउंट एवरेस्ट पर 52 साल के शेरपा गाइड दावा 'हिलेरी' ने बिना खाना-पानी और ऑक्सीजन के 6 दिन बिता दिए। गुरुवार को वह सुबह बेस कैंप के पास मिले।

चढ़ाई का मौसम खत्म हो चुका था और रास्ते से रस्सियाँ और सीढ़ियाँ हटा दी गई थीं। दावा के परिवार ने उन्हें मृत मानकर अंतिम संस्कार तक की तैयारी कर ली थी। लेकिन फिर उन्हें दावा के जिंदा होने की जानकारी मिली।

आखिरी बार 29 मई को देखा गया था

दरअसल दावा 28 मई की शाम को ब्रिटिश पर्वतारोही क्रिस थ्रॉल और एक पोलिश पर्वतारोही के ग्रुप के साथ नीचे उतर रहे थे। उन्हें आखिरी बार 29 मई को येलो बैंड के पास देखा गया था।

थ्रॉल ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया। इसमें उन्होंने चोटी से नीचे उतरने के दौरान हुए घटनाक्रम के बारे में बताया। थ्रॉल ने कहा, 'हम नीचे लौट रहे थे तभी दावा अपने बैकपैक के साथ आराम करने के लिए बैठ गए। मैंने उनसे पूछा कि क्या तुम ठीक हो। इस पर उन्होंने कहा कि मैं ठीक हूं, तुम प्लीज जाओ।'

साथी ने बताया किस्सा

थ्रॉल ने आगे बताया, 'मैं ब्रिटिश रॉयल मरीन से हूं और हमें सिखाया जाता है कि किसी को भी पीछे न छोड़ें। मेरे पास ऑक्सीजन का सिर्फ आधा टैंक बचा था और दो ऑप्शन थे। या तो मैं पोलिश पर्वतारोही को साथ लूं जिसे फ्रॉस्टबाइट हुआ या शेरपा के लिए वापस जाऊं, जो शायद खुद आ जाए, क्योंकि वह पहले भी सैंकड़ों बार ऐसा कर चुका है।'

थ्रॉल ने आगे बताया कि उन्होंने पोलिश पर्वतारोही के साथ अपनी ऑक्सीजन शेयर की और उसके साथ नीचे आए। बेस कैंप में पहुंचने पर उन्होंने दावा के लापता होने की सूचना दी।

एक बिस्किट के पैकेट पर किया गुजारा

सागरमाथा पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी की सफाई टीम रास्ते से उपकरण हटा रही थी, तब उन्होंने दावा को क्रैम्पॉन पॉइंट के पास देखा और उन्हें नीचे लाई। उन्हें फ्रॉस्टबाइट और अन्य दिक्कतों के कारण काठमांडू के अस्पताल ले जाया गया। फिलहाल वह खतरे के बाहर हैं।

बताया जा रहा है कि दावा सिर्फ बर्फ और बिस्किट के एक पैकेट के सहारे एवरेस्ट पर जिंदा रहे। वे बचे हुए टेंट से खाने-पीने का सामान और फेंकी हुई ऑक्सीजन की बोतलें ढूंढकर गुजारा कर रहे थे।


खराब मौसम में बिना खाने, पानी या अतिरिक्त ऑक्सीजन के 25000 फीट से 17 हजार फीट तक 12 किलोमीटर का सफर उन्होंने तय कर लिया। उन्होंने खतरनाक खुम्बु आइसफॉल को तब पार किया जब चढ़ाई का मौसम खत्म हो चुका था और रास्ते से रस्सियां और सीढ़ियां हटा दी गई थीं।

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