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भारत-पाक सीमा से 15 किमी तक अतिक्रमण पर सख्ती, जैसलमेर के 41 गांवों का सर्वे

प्रशासन अब सीमा से 0 से 15 किलोमीटर के दायरे में आने वाले क्षेत्रों का विस्तृत सर्वे करेगा। इस दौरान यह देखा जाएगा कि कहीं किसी सरकारी व निजी जमीन पर अवैध कब्जा तो नहीं किया गया है

By लखन भारती

Jun 05, 2026 18:39 IST

राजस्थान के जैसलमेर जिले में भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे इलाकों की सुरक्षा को और मजबूत करने की तैयारी शुरू हो गई है। जिला प्रशासन ने सीमा से 15 किलोमीटर तक के क्षेत्र में होने वाले अतिक्रमण और निर्माण गतिविधियों की जांच करने का फैसला किया है। इसके लिए बड़े स्तर पर सर्वे कराया जाएगा और नियमों के खिलाफ पाए जाने वाले मामलों पर दिवाली से पहले कार्रवाई की जाएगी।

जिला कलेक्टर अनुपमा जोरवाल ने बताया कि हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री और मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में सीमावर्ती जिलों के अधिकारियों की बैठक हुई थी। इस बैठक में सीमा सुरक्षा, सूचना तंत्र को मजबूत करने और सीमा क्षेत्र में जमीन के उपयोग पर नजर रखने के लिए विशेष निर्देश दिए गए हैं।

प्रशासन अब सीमा से 0 से 15 किलोमीटर के दायरे में आने वाले क्षेत्रों का विस्तृत सर्वे करेगा। इस दौरान यह देखा जाएगा कि कहीं किसी सरकारी या निजी जमीन पर अवैध कब्जा तो नहीं किया गया है। यदि किसी प्रकार का अवैध निर्माण या नियमों के विरुद्ध गतिविधि सामने आती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

कलेक्टर ने कहा कि सीमावर्ती इलाकों में मजबूत सूचना नेटवर्क होना बेहद जरूरी है। इसके लिए पुलिस, प्रशासन, बीएसएफ, खुफिया एजेंसियों और सेना के बीच होने वाली मासिक बैठकों को और प्रभावी बनाया जाएगा। साथ ही पटवारी, पशुपालक, पूर्व सैनिक और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को भी सूचना तंत्र से जोड़ा जाएगा ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी समय पर मिल सके।

प्रशासन सीमा क्षेत्र में होने वाले निर्माण कार्यों की फंडिंग की भी जांच करेगा। अधिकारियों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति खेती या सामान्य उपयोग के लिए जमीन का इस्तेमाल कर रहा है तो स्थिति अलग है, लेकिन बड़े पैमाने पर निर्माण होने पर यह पता लगाया जाएगा कि इसके लिए धन कहां से आ रहा है।

इसके अलावा जैसलमेर के 41 सीमावर्ती गांवों का विस्तृत सुरक्षा नक्शा और डेटा बैंक तैयार किया जाएगा। इसमें जमीन की स्थिति, वहां रहने वाले लोगों और वैध-अवैध निर्माण गतिविधियों की पूरी जानकारी दर्ज की जाएगी। सर्वे पूरा होने के बाद रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजी जाएगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई और सुरक्षा रणनीति तय की जाएगी।

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