हर साल 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस (World Environment Day) मनाया जाता है। इसे लोगों को पर्यावरण संरक्षण और उसकी रक्षा के प्रति जागरूक बनाने, प्रदूषण को कम करने के उद्देश्य से मनाया जाता है। आज के समय में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सबसे बड़ा बाधक प्लास्टिक बन चुका है।
प्लास्टिक न सिर्फ मानव और जीव-जन्तुओं के स्वास्थ्य बल्कि प्रकृति के लिए भी बेहद खतरनाक माना जाता है। नदियों को गंदा करने, जंगलों को प्रदूषित और हमारे खाने-पीने की वस्तुओं के साथ मिलकर प्लास्टिक के न जाने कितने कण हमारे शरीर में प्रवेश करते रहते हैं।
हालांकि आज हमारे देश के कई राज्यों में प्लास्टिक से होने वाले नुकसान को समझकर इसपर नियंत्रण लाने के लिए सिंगल यूज प्लास्टिक पर बैन लगाया जा चुका है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में सबसे पहले प्लास्टिक पर बैन करने की दिशा में सबसे पहला कदम किस राज्य में उठाया गया था?
सबसे पहले सिक्किम में हुआ था प्लास्टिक बैन
रिपोर्ट्स की मानें तो भारत में सबसे पहले जिस राज्य में प्लास्टिक बैन किया गया था, वह सिक्किम। बात 90 के दशक की है जब 1998 में सिक्किम ने यह कदम उठाकर सबको चौंका दिया था।
सिक्किम ही वह पहला राज्य था जहां डिस्पोजेबल प्लास्टिक की थैलियों यानी सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूरी तरह से पाबंदी लगायी गयी थी। सिक्किम का यह कदम आगे चलकर अन्य राज्यों के लिए मिसाल बन गया था।
सख्त किए नियम
सिक्किम ने सिर्फ डिस्पोजेबल प्लास्टिक के इस्तेमाल पर बैन ही नहीं लगाया बल्कि इस अभियान में एक कदम आगे बढ़ते हुए उसने कई अन्य कठोर नियम भी लागू किए। खासतौर पर जीवनदायिनी पेयजल को प्रदूषित होने से बचाने के लिए साल 2016 में सिक्किम ने सभी सरकारी ऑफिसों और सरकारी आयोजनों में पैकेज्ड ड्रिकिंग वॉटर का इस्तेमाल करना बंद कर दिया।
इस फैसले को सिंगल-यूज प्लास्टिक पर निर्भरता को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है। इसके बाद सिक्किम सरकार ने थर्मोकोल से बने डिस्पोजेबल कप, प्लेट, कटोरी या कटलरी का उपयोग करना भी बंद कर दिया। इसकी जगह पर ऐसे विकल्पों का इस्तेमाल किया जाने लगा जो प्राकृतिक रूप से नष्ट हो जाते हो।
लोगों में बढ़ी जागरूकता
शुरुआत में भले ही लोगों में प्लास्टिक बैन को उत्साहित करने के लिए जुर्माने का प्रावधान लगाया गया लेकिन बाद में समय के साथ-साथ लोगों ने प्लास्टिक से होने वाले खतरों को पहचाना। इसके बाद विकल्प के तौर पर सिक्किम के लोगों ने पत्तों, बांस और अन्य जैविक सामग्रियों से बने उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा दिया जो आसानी से और प्राकृतिक रूप से नष्ट हो जाती है और पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित मानी जाती है।