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लापता फलता का 'पुष्पा', खाली मैदान में भाजपा दागेगी गोल! तृणमूल की चिंता बढ़ी

जहांगीर खान इलाके से पूरी तरह से लापता हैं। मिली जानकारी के अनुसार वर्तमान में वह कोलकाता में कहीं छिपे हुए हैं।

By Debarghya Bhattacharya, Moumita Bhattacharya

May 10, 2026 12:08 IST

राज्य की 294 सीटों में से 293 सीटों पर मतदात हुआ जिसमें बहुमत के साथ भाजपा की सरकार बन चुकी है। मुख्यमंत्री के तौर पर भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के साथ 5 अन्य मंत्रियों ने भी पद और गोपनियता की शपथ ली। लेकिन अभी भी दक्षिण 24 परगना जिले के फलता विधानसभा केंद्र पर मतदान बाकी है।

उससे पहले ही इलाके के माहौल में काफी बदलाव नजर आ रहा है। चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद ही फलता के स्वघोषित 'पुष्पा' और तृणमूल प्रत्याशी जहांगीर खान के पार्टी ऑफिस में तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आयी।

लेकिन अब जहांगीर खान इलाके से पूरी तरह से लापता हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार वर्तमान में वह कोलकाता में कहीं छिपे हुए हैं। पूरे फलता इलाके के हजारों तृणमूल कार्यकर्ता या तो घर-बाड़ छोड़कर भाग गए हैं या फिर खुद को स्वेच्छा से घरों में कैद कर लिया है। ऐसी स्थिति में जिस दिन फलता में चुनाव होगा, तब मतदान बूथों पर तृणमूल का एजेंट भी बैठाया जा सकेगा या नहीं, इसे लेकर ही संशय है।

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29 अप्रैल को मतदान के दौरान फलता के भाजपा प्रत्याशी देवांशु पांडा ने EVM पर सफेद टेप लगाने का आरोप लगाते हुए पुनर्निर्वाचन की मांग की। बाद में चुनाव आयोग के आदेश पर तत्कालीन विशेष पर्यवेक्षक सुब्रत गुप्त ने अपनी रिपोर्ट जमा की जिसमें इस शिकायत की सत्यता प्रमाणित हुई। इसके बाद फलता में पुनर्निर्वाचन का फैसला लेते हुए 21 मई को मतदान की नई तारीख की घोषणा की गयी। मतगणना 24 मई को होगी।

फलता के एक तृणमूल नेता ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि मेरे जैसे काफी लोगों ने ही इलाका छोड़ दिया है। घर जाने पर ही हमपर हमला हो सकता है। चुनाव करवाने के लिए जान खतरे में डालकर कोई भी इलाके में वापस नहीं लौटना चाहता है। इसलिए अधिकांश बूथ पर ही एजेंट बैठाना शायद संभव नहीं होगा।

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पार्टी के कोई नेता-कार्यकर्ता भी पुनर्निर्वाचन को लेकर सोच-विचार नहीं कर रहे हैं। सभी एक ही बात कह रहे हैं - पहले जान तो बच जाए। इसके अलावा सरकार भी अब हाथों से निकल चुकी है। तो फलता जीतकर क्या फायदा?

वहीं फलता से भाजपा नेता विधान पाडुई ने कहा कि राज्य में सत्ता परिवर्तन के साथ ही फलता और एक बार स्वतंत्र हुआ। तृणमूल के अत्याचार से आज लोग सड़कों पर उतर आएं हैं। लोगों के विरोध के सामने तृणमूल का हाथ थामने वाला अब कोई नहीं है। जहांगीर खान और उसके साथी भाग खड़े हुए हैं। हम चाहते हैं कि लोग शांति से अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें।

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