कोलकाताः पश्चिम बंगाल की सत्ता संभालने के तुरंत बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं। मुख्यमंत्री बनने के बाद अब वह 11 मई को अपनी सरकार की पहली बड़ी प्रशासनिक बैठक करने जा रहे हैं। यह अहम बैठक नवान्न सभागार में आयोजित होगी, जिसमें राज्य के सभी जिलों के पुलिस अधीक्षक (SP) और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी शामिल होंगे। माना जा रहा है कि इस बैठक में कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक प्राथमिकताएं और नई सरकार के कामकाज की रूपरेखा तय की जाएगी।
शपथ ग्रहण के बाद शुभेंदु अधिकारी ने कोलकाता स्थित भारतीय जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी के आवास पर जाकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उन्होंने कहा कि भाजपा की विचारधारा और राजनीतिक आधार श्यामा प्रसाद मुखर्जी के संघर्ष और योगदान से जुड़ा है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि वे राज्य मंत्रिमंडल और विधानसभा में 20 जून 1947 को पश्चिम बंगाल के स्थापना दिवस के रूप में मान्यता देने का प्रस्ताव रखेंगे। इसे भाजपा सरकार के वैचारिक और ऐतिहासिक एजेंडे से जोड़कर देखा जा रहा है।
इसके बाद उन्होंने भारत सेवाश्रम संघ जाकर स्वामी प्रणवानंद को भी श्रद्धांजलि दी। शनिवार को हुए भव्य शपथ ग्रहण समारोह में शुभेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इसके साथ ही राज्य में 15 वर्षों से जारी तृणमूल कांग्रेस के शासन का अंत हो गया।
इस दौरान भाजपा नेता- दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, अशोक कीर्तनिया, खुदीराम टुडू और निशिथ प्रमाणिक ने मंत्री पद की शपथ ली। समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री भी कार्यक्रम में शामिल हुए। शपथ ग्रहण के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने उन भाजपा कार्यकर्ताओं के परिवारों से मुलाकात की, जिनकी पिछले वर्षों में राजनीतिक हिंसा में मौत हुई थी।
भाजपा ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में 207 सीटें जीतकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की, जबकि तृणमूल कांग्रेस को 80 सीटों पर संतोष करना पड़ा। शुभेंदु अधिकारी ने भवानीपुर सीट से ममता बनर्जी को 15 हजार से अधिक वोटों से हराया था और नंदीग्राम सीट भी बरकरार रखी थी।