विधानसभा चुनाव के पहले चरण में महज 1 दिन का समय रह गया है। उससे पहले चुनाव आयोग ने सख्ती दिखाते हुए एक अभूतपूर्व फैसला सुनाया है। चुनाव आयोग ने अब तक शराब की दुकान, मोटर साइकिल की सवारी आदि को लेकर कई नियम जारी किए हैं लेकिन अब...!
अब चुनाव आयोग आपके घर पर भी निगरानी कर रहा है। आयोग की नई विज्ञप्ति के मुताबिक चुनाव के दौरान राज्य के बहुमंजिला बिल्डिंग में सिर्फ संबंधित केंद्र के मतदाता ही रह सकेंगे। किसी भी बाहरी व्यक्ति यहां तक कि रिश्तेदारों को भी रहने की अनुमति नहीं होगी।
गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने मतदान से 96 घंटा पहले ही उन इलाकों में भी शराब की दुकानों और बार को बंद करने का फैसला लिया है जहां 23 अप्रैल को पहले चरण का मतदान नहीं होगा। इसके साथ ही चुनाव वाले दिन मोटर साइकिल की सवारी को लेकर भी कई पाबंदियां लगायी गयी हैं। अब बहुमंजिला बिल्डिंग में रहने वाले लोगों को लेकर नया आदेश जारी किया गया है।
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प्रशासन सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार चुनाव के दौरान सुरक्षा व्यवस्था ऐसी रहे कि परिंदा भी पर न मार सकें। इसे सुनिश्चित करने के लिए ही यह कदम उठाया गया है। इस बाबत जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि इस साल कई बहुमंजिला बिल्डिंग में भी मतदान केंद्र बनाएं गए हैं।
इसलिए प्रशासन कोई खतरा नहीं मोल लेना चाहती है। मतदान के दौरान 'बाहरी' लोगों की उपस्थिति को किसी भी प्रकार से बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मतदान के समय सिर्फ विधानसभा केंद्र में रजिस्टर मतदाता ही वहां रह सकेंगे।
सुरक्षा या फिर व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर प्रहार?
दावा किया जा रहा है कि मतदान प्रक्रिया में बाहरी लोगों के प्रभाव को रोकने और कानून-व्यवस्था का संतुलन बनाए रखने के लिए ही यह निर्णय लिया गया है। हालांकि, इस आदेश को लेकर लोगों के बीच मिश्रित प्रतिक्रिया देखी जा रही है।
कुछ लोगों का कहना है कि निष्पक्ष चुनाव के हित में ऐसी सख्ती जरूरी है। वहीं कुछ अन्य लोगों का कहना है कि चुनाव के नाम पर आम लोगों के दैनिक जीवन पर अनावश्यक प्रतिबंध थोपे जा रहे हैं। उनका सवाल है कि अगर कोई रिश्तेदार या दोस्त जो दूसरे राज्य या शहर का रहने वाला है, वह आ जाता है तो क्या उसे होटल में रहना होगा? लेकिन कुछ जिलों के होटलों में भी तो दूसरे जिलों के पर्यटकों के रहने पर पाबंदी लगायी गयी है।
प्रशासनिक सूत्रों से इन सवालों का कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिल सका है। उनका साफ कहना है कि चुनाव के दौरान इस नियम का पालन करना ही होगा। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भले ही चुनाव आयोग स्वतंत्र और शांतिपूर्ण मतदान कराने की कोशिशें कर रहा है लेकिन यह फैसला व्यक्तिगत स्वतंत्रता में हस्तक्षेप के समान है।
प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पुलिस को पहले ही प्रत्येक बहुमंजिला बिल्डिंग के गेस्ट रजिस्टर की जांच करने का निर्देश दिया गया है। अब देखना यह है कि दो चरणों वाले इस मतदान में आयोग का यह 'लोहे का कवच' कितना प्रभावी साबित होता है।