मणिपुर के नागा जनजाति के लोगों ने 3 दिनों के बंद का आह्वान किया है। बंद के दौरान ही एक बार फिर से नागा और कूकी जनजाति के लोगों के बीच संघर्ष शुरू हो जाने की वजह से मणिपुर में फिर से तनाव फैल गया है।
मंगलवार को दोनों समूहों के बीच सेनापति और कांगोकपी (Kangokpi) जिलों में संघर्ष हुआ। इस दौरान कई गाड़ियों में तोड़फोड़ कर उन्हें आग के हवाले कर देने का आरोप लगाया गया।
परिस्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने मंगलवार की शाम से कांगोकपी जिले के कई इलाकों में कर्फ्यू लगा दिया है। जिले के जिलाधिकारी महेश चौधरी ने बताया कि सुरक्षा के मद्देनजर ही यह कदम उठाया गया है।
वहीं दूसरी ओर दिन के समय थौबाल इलाके में लोगों ने पथावरोध किया। मणिपुर के मुख्यमंत्री वाई खेमचंद सिंह उसी इलाके में दौरे पर जाने वाले थे। उससे पहले पथावरोध व तनाव देखा गया। प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए पुलिस को आंसूगैस के गोले दागने पड़े।
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बता दें, गत 18 अप्रैल को इम्फाल-उरथुल रोड पर हमले में नागा जनजाति के 3 लोगों की मौत हो गयी थी। नागा संगठनों का आरोप है कि कूकी जनजाति के लोगों ने उनपर हमला किया था।
इस हमले के विरोध में United Naga Council ने तीन दिनों की बंद बुलायी है। सोमवार की रात से पथावरोध शुरू हो गया। बताया जाता है कि मंगलवार की सुबह सुरक्षा कर्मी पथावरोध हटाने गए। उसी समय नागा और कूकी जनजातियों के बीच संघर्ष शुरू हो गया।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार चैंगोबूं इलाके में कूकी गांव के निवासियों के इस मामले में शामिल होने की वजह से परिस्थिति और भी तनावपूर्ण हो गयी।
दोनों पक्षों के बीच पत्थरबाजी भी हुई। पुलिस के एक अधिकारी से मिली जानकारी के अनुसार उस दौरान कुछ राउंड गोलियां भी चलने की आवाज सुनाई दी। हालांकि गोली किसने चलायी थी यह स्पष्ट नहीं हो सका। वहीं दूसरी ओर नागा संगठन के बंद का प्रभाव उरथुल, कामजं, सेनापति, नने और तामेंलं इलाकों पर पड़ा है।
गुरुवार को हत्या के विरोध में नागा बहुसंख्या इलाकों मोमबत्ती जुलूस निकाली जाएगी। नागा संगठनों की ओर से स्पष्ट किया गया है कि बंद के दौरान कूकी के साथ सामाजिक और वित्तीय किसी भी प्रकार का कोई संबंध नहीं रखा जाएगा। बताया जाता है कि फिर से कोई तनाव न फैले इसे सुनिश्चित करने के लिए इलाके में बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है।