जयपुर: महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष अलका लांबा ने मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी पर “महिलाओं के प्रति विरोधी” होने का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी ने जानबूझकर महिला आरक्षण कानून को लागू करने में देरी की है।
अलका लांबा ने कहा कि वर्ष 2023 में महिला आरक्षण से संबंधित विधेयक सर्वसम्मति से पारित हो गया था लेकिन सरकार ने लगभग 30 महीनों तक इस कानून को अधिसूचित ही नहीं किया।
जयपुर स्थित कांग्रेस कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि सरकार ने पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में चल रहे चुनावों के दौरान संसद का विशेष सत्र बुलाकर जनता को भ्रमित करने का प्रयास किया।
उन्होंने कहा- “यह महिला आरक्षण कानून लाने के लिए सत्र नहीं था। वह कानून पहले ही पारित हो चुका है। सरकार ने जो कदम उठाया वह परिसीमन से जुड़ा हुआ था लेकिन उसे इस तरह प्रस्तुत किया गया जिससे भ्रम पैदा हो।”
अलका लांबा ने यह भी कहा कि विपक्ष ने विशेष सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक की मांग की थी लेकिन सरकार की ओर से कोई प्रस्ताव साझा नहीं किया गया। उन्होंने सत्र के समय पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि कई सांसद उस समय चुनाव प्रचार में व्यस्त थे।
उन्होंने कहा- “यह सत्र चुनावों के बाद या मानसून सत्र में भी आयोजित किया जा सकता था। चुनाव में व्यस्त सांसदों की राय भी ली जानी चाहिए थी।”
महिला कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन की भी आलोचना की और आरोप लगाया कि वह राजनीतिक प्रकृति का था तथा उसमें केवल विपक्ष पर निशाना साधा गया।
अलका लांबा ने मांग की कि मौजूदा 534 सीटों के भीतर ही 33 प्रतिशत आरक्षण को तुरंत लागू किया जाए।
उन्होंने यह भी दावा किया कि एकजुट विपक्ष ने सरकार को अपना एजेंडा आगे बढ़ाने से रोका।
उन्होंने कहा- “हम लगातार दबाव बनाते रहेंगे ताकि इस कानून को जल्द से जल्द लागू किया जा सके।”
अलका लांबा ने यह भी घोषणा की कि कांग्रेस महिला आरक्षण को लेकर देशव्यापी आंदोलन शुरू करेगी और हस्ताक्षर अभियान चलाकर इसे राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को मानसून सत्र के दौरान सौंपा जाएगा।