नयी दिल्लीःपश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर देखने को मिल रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है, लेकिन इसके बावजूद भारत में ईंधन आपूर्ति सामान्य बनी हुई है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (Ministry of Petroleum and Natural Gas)के अनुसार, जनवरी में भारतीय क्रूड बास्केट की कीमत लगभग 63 डॉलर प्रति बैरल थी, जो मार्च में बढ़कर 113 डॉलर और अप्रैल में औसतन 116 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई।
मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि वैश्विक अस्थिरता के बावजूद देश में ईंधन आपूर्ति पर कोई असर नहीं पड़ा है। उन्होंने कहा कि भारत के पड़ोसी देशों की तुलना में घरेलू ईंधन कीमतें अभी भी अपेक्षाकृत कम हैं। एलपीजी आपूर्ति को लेकर भी सरकार ने स्थिति को स्थिर बताया है। घरेलू रसोई गैस की सप्लाई और डिलीवरी सामान्य है और किसी भी स्तर पर गैस की कमी नहीं है। वर्तमान में डिलीवरी दक्षता लगभग 93 प्रतिशत बनी हुई है।
हालांकि ऑनलाइन बुकिंग में हल्की गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन वाणिज्यिक एलपीजी आपूर्ति को फिर से सामान्य कर दिया गया है। सरकार ने छोटे 5 किलो के सिलेंडरों की उपलब्धता भी बढ़ाई है, जिससे प्रवासी और निम्न आय वर्ग के लोगों को राहत मिल रही है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, प्राकृतिक गैस की आपूर्ति और सीएनजी सेवाएं पूरी तरह सुचारू हैं। देशभर में नए पीएनजी कनेक्शन भी तेजी से बढ़ रहे हैं।
सरकार ने यह भी बताया कि पेट्रोल पंपों पर किसी भी प्रकार की कमी नहीं है और रिफाइनरी पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं। साथ ही अनियमितताओं को रोकने के लिए हजारों निरीक्षण और छापेमारी की गई है। वैश्विक संकट के बीच कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल जरूर देखा गया है, लेकिन भारत में ईंधन और गैस आपूर्ति स्थिर रहकर उपभोक्ताओं को राहत दे रही है।