नई दिल्ली : पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर भारत के एविएशन, पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर पर तेजी से दिख रहा है। पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) की रिपोर्ट के अनुसार विदेशी पर्यटकों की संख्या में 15 से 20 प्रतिशत तक की कमी आई है। वहीं एविएशन सेक्टर को लगभग 18,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
रिपोर्ट के मुताबिक साल 2025 में इन सेक्टरों में अच्छी रिकवरी देखी गई थी लेकिन 2026 की शुरुआत में बढ़ते तनाव ने हालात बदल दिए। इससे बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है।
एविएशन सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। कई उड़ानें रद्द हो रही हैं। कई अंतरराष्ट्रीय रूट बदलने पड़ रहे हैं। इससे यात्रा का समय 2 से 4 घंटे तक बढ़ गया है। ज्यादा समय का मतलब ज्यादा ईंधन खर्च। पहले ही ईंधन कुल खर्च का 35 से 40 प्रतिशत हिस्सा होता है। अब लागत और बढ़ गई है।
मध्य-पूर्व के हवाई मार्ग प्रभावित हुए हैं। ये दुनिया के सबसे व्यस्त रूट माने जाते हैं। इनके बाधित होने से कनेक्टिविटी कमजोर हुई है। हवाई किराए भी बढ़ गए हैं।
इसका असर पर्यटन पर साफ दिख रहा है। खासकर घूमने आने वाले विदेशी पर्यटक कम हुए हैं। लोग अभी यात्रा को लेकर सतर्क हैं।
भारतीय यात्रियों के रुझान में भी बदलाव आया है। अब लोग दूर के देशों की जगह पास के देशों को चुन रहे हैं। थाईलैंड, सिंगापुर और वियतनाम जैसे स्थान ज्यादा पसंद किए जा रहे हैं।
हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में घरेलू यात्रियों से कुछ राहत मिल रही है। होटल भरे हुए हैं लेकिन खर्च बढ़ने से मुनाफा कम हो रहा है। खासकर बड़े और बिजनेस होटलों पर ज्यादा दबाव है।
रेस्टोरेंट सेक्टर भी मुश्किल में है। करीब 10 प्रतिशत रेस्टोरेंट बंद हो चुके हैं। हर महीने लगभग 79,000 करोड़ रुपये के कारोबार में कमी आ रही है। आयातित सामान, ऊर्जा और ट्रांसपोर्ट महंगा हो गया है। इनपुट लागत 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ी है।
हालांकि फूड डिलीवरी और घरेलू मांग से कुछ सहारा मिल रहा है लेकिन छोटे कारोबारियों के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण है।
रिपोर्ट में सुझाव दिए गए हैं। नए एयर रूट विकसित करने की जरूरत है। टैक्स में राहत दी जानी चाहिए। एमएसएमई को मदद मिलनी चाहिए। साथ ही घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देना जरूरी है।
रिपोर्ट के अनुसार यह संकट चुनौती जरूर है लेकिन इससे भविष्य में मजबूत पर्यटन ढांचा तैयार करने का मौका भी मिल सकता है।