नई दिल्लीः नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रिया के चांसलर क्रिश्चियन स्टॉकर के बीच महत्वपूर्ण बैठक हैदराबाद हाउस में हुई। इस मुलाकात को दोनों देशों के संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। चार दिन की भारत यात्रा पर आए स्टॉकर ने इस दौरे को द्विपक्षीय रिश्तों के लिए “मील का पत्थर” बताया।
पहली विदेश यात्रा के तौर पर भारत का चयन, संबंधों पर जोर
बैठक के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यूरोप के बाहर अपनी पहली आधिकारिक यात्रा के लिए भारत को चुनना, भारत-ऑस्ट्रिया संबंधों को लेकर स्टॉकर की स्पष्ट सोच और प्रतिबद्धता को दर्शाता है। वहीं स्टॉकर ने भारत की करीब 7 प्रतिशत की आर्थिक विकास दर की सराहना करते हुए इसे निवेश और व्यापार के लिए बेहद आकर्षक बताया। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रियाई कंपनियां भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था का लाभ उठा सकती हैं।
व्यापार, तकनीक और ग्रीन एनर्जी में सहयोग बढ़ाने पर सहमति
दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भरोसेमंद साझेदारियों की अहमियत बढ़ गई है। स्टॉकर ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रिया मिलकर व्यापार, तकनीक और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को नई ऊंचाई पर ले जाएंगे, जिससे दोनों देशों के उद्योगों और नागरिकों के लिए नए अवसर पैदा होंगे। साथ ही यूरोपीय संघ-भारत मुक्त व्यापार समझौते के लागू होने से रिश्तों को और मजबूती मिलने की उम्मीद जताई गई।
ऑस्ट्रिया की टनल विशेषज्ञता और भारत में योगदान
प्रधानमंत्री मोदी ने ऑस्ट्रिया की टनल निर्माण तकनीक की विशेष सराहना की। उन्होंने कहा कि दिल्ली मेट्रो और हिमालय में 10,000 फीट की ऊंचाई पर बने अटल टनल जैसे प्रोजेक्ट्स में ऑस्ट्रिया की विशेषज्ञता का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इसके अलावा रेलवे, गुजरात के गिरीनार रोपवे, स्वच्छ ऊर्जा और शहरी विकास परियोजनाओं में भी ऑस्ट्रियाई कंपनियों की सक्रिय भागीदारी रही है।
रक्षा, सेमीकंडक्टर और शिक्षा क्षेत्र में नई साझेदारी
मोदी ने कहा कि दोनों देश रक्षा, सेमीकंडक्टर, क्वांटम तकनीक और बायोटेक्नोलॉजी जैसे उन्नत क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। साथ ही इंजीनियरिंग और तकनीकी शिक्षा में भी साझेदारी को मजबूत किया जाएगा। इस दिशा में आईआईटी दिल्ली और ऑस्ट्रिया की मॉन्टन यूनिवर्सिटी के बीच हुआ समझौता महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
15 अहम समझौते, हाई-टेक सहयोग बनेगा मुख्य आधार
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार, इस यात्रा के दौरान आतंकवाद विरोध, व्यापार, कौशल विकास और रक्षा सहित कुल 15 ठोस परिणाम सामने आए हैं। उन्होंने बताया कि “हाई-टेक सहयोग” को भारत-ऑस्ट्रिया साझेदारी का केंद्रीय स्तंभ बनाया गया है। इसके अलावा दोनों देशों ने सांस्कृतिक आदान-प्रदान, निवेश और लोगों के बीच संपर्क को भी बढ़ाने पर सहमति जताई।