नई दिल्ली : संसद के विशेष सत्र के दौरान लोकसभा में पेश किए गए तीन महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा और मतदान का विस्तृत कार्यक्रम तय कर दिया गया है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने गुरुवार को जानकारी दी कि इन विधेयकों पर कुल 15 से 18 घंटे तक बहस चलेगी, जबकि मतदान शुक्रवार शाम 4 बजे कराया जाएगा।
सदन में बोलते हुए ओम बिरला ने स्पष्ट किया कि चर्चा के लिए पर्याप्त समय निर्धारित किया गया है ताकि सभी पक्ष अपनी बात रख सकें और उसके बाद निर्धारित समय पर मतदान कराया जाएगा।
वहीं केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने चर्चा की अवधि को लेकर अपनी राय रखते हुए कहा कि बहस लगभग 12 घंटे तक चल सकती है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि आवश्यकता पड़ने पर चर्चा का समय बढ़ाने का अधिकार अध्यक्ष के पास होना चाहिए। साथ ही उन्होंने पुष्टि की कि मतदान अगले दिन ही होगा।
इस दौरान कांग्रेस सांसद के. सी. वेणुगोपाल ने एक साथ कई विधेयक पेश किए जाने पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि इस तरह विधेयकों को एक साथ लाना संसदीय परंपरा के अनुरूप नहीं है और इसके नतीजे भी सामने आ सकते हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि संविधान संशोधन विधेयक पारित होने की संभावना कम है तो आगे की प्रक्रिया का क्या औचित्य रह जाता है।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सरकार के रुख का बचाव किया। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संशोधन और सामान्य विधायी संशोधनों के लिए मतदान की प्रक्रिया अलग-अलग होती है। साथ ही महिलाओं के आरक्षण को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए इन संबंधित विधेयकों को साथ लाना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि पहले भी ऐसे उदाहरण रहे हैं जब एक ही विषय से जुड़े कई विधेयक एक साथ पेश किए गए थे, जबकि विपक्ष हर मुद्दे का विरोध करने की रणनीति अपना रहा है।
गौरतलब है कि लोकसभा में आज संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026, डिलिमिटेशन विधेयक, 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किए गए। इन विधेयकों को पेश करने के दौरान विपक्ष ने ध्वनिमत के बजाय विभाजन (डिवीजन) की मांग की थी।
अंतिम मतदान के आंकड़ों के अनुसार कुल 333 मत पड़े, जिनमें 251 सांसदों ने समर्थन में और 185 सांसदों ने विरोध में वोट दिया।