पटनाः बिहार की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हो गया है, जहां लंबे समय तक नेतृत्व करने वाले नीतीश कुमार के बाद अब सत्ता की कमान बदल गई है। बुधवार को भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता सम्राट चौधरी ने राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
सुबह पटना स्थित राजभवन परिसर (लोक भवन) में आयोजित समारोह मेंभाजपा बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इसके साथ ही वे बिहार में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री बन गए हैं। उन्होंने उस स्थान को संभाला है, जिसे नीतीश कुमार ने एक दशक से अधिक समय तक अपने नेतृत्व से स्थापित किया था। हाल ही में नीतीश कुमार ने राज्य की राजनीति से दूरी बनाते हुए राज्यसभा का रुख किया।
57 वर्षीय सम्राट चौधरी के सामने बड़ी जिम्मेदारी है क्योंकि वे ऐसे नेता की जगह ले रहे हैं, जिन्होंने “सुशासन” की छवि के साथ लंबे समय तक राज्य पर शासन किया। वर्ष 2025 में एनडीए की जीत के बाद नीतीश कुमार ने रिकॉर्ड दसवीं बार मुख्यमंत्री पद संभाला था।
सम्राट चौधरी का राजनीतिक सफर भी दिलचस्प रहा है। उन्होंने 1990 के दशक में राष्ट्रीय जनता दल से अपने करियर की शुरुआत की थी और फिर 2018 में भाजपा में शामिल हुए। 1968 में जन्मे चौधरी एक राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनके पिता शकुनी चौधरी छह बार विधायक रहे, जबकि उनकी मां पार्वती देवी ने भी तारापुर सीट से चुनाव जीता था।
2024 में भाजपा और जदयू के फिर से साथ आने से पहले चौधरी नीतीश कुमार के मुखर आलोचक रहे थे। उन्होंने 2022 में यह तक कहा था कि जब तक नीतीश कुमार सत्ता से हट नहीं जाते, तब तक वे अपनी केसरिया पगड़ी नहीं उतारेंगे। बाद में 2023 में उन्हें भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया और 2024 में वे उपमुख्यमंत्री बने।
2025 के विधानसभा चुनाव में एनडीए की जीत के बाद से ही यह चर्चा तेज हो गई थी कि नीतीश कुमार राज्य की सक्रिय राजनीति से हट सकते हैं। ऐसे में ओबीसी वर्ग, खासकर कोयरी/कुशवाहा समुदाय में मजबूत पकड़ और आक्रामक राजनीतिक शैली के कारण सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री पद का प्रमुख दावेदार माना जा रहा था।
सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री बनना न सिर्फ एक नेतृत्व परिवर्तन है, बल्कि यह बिहार की राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत का संकेत भी माना जा रहा है।