जदयू सुप्रीमो नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। अगले मुख्यमंत्री पद के लिए सम्राट चौधरी के नाम पर मुहर लग चुकी है। आज पटना के लोकभवन में सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। मिली जानकारी के अनुसार उनके साथ दो अन्य डेप्यूटी चीफ मिनीस्टर के पद की शपथ भी लेने वाले हैं। पटना में आज खूब चहल-पहल भी देखी जा रही है। इसके साथ ही बिहार के नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के बारे में जानने की उत्सुकता भी लोगों में काफी ज्यादा है।
आइए जान लेते हैं कौन हैं सम्राट चौधरी? कैसा रहा उनका राजनीति सफर?
क्या है सम्राट चौधरी की शैक्षणिक योग्यता?
मिली जानकारी के अनुसार सम्राट चौधरी ने अपनी शुरुआती पढ़ाई बिहार से ही पूरी की थी। बाद में उन्होंने मदुरै के कामराज यूनिवर्सिटी से अपनी उच्च शिक्षा प्राप्त की। चुनावी हलफनामे में उन्होंने प्री-फाउंडेशन कोर्स का भी जिक्र किया था। दावा किया जाता है कि सम्राट चौधरी के पास D.litt की मानद उपाधी भी है। हालांकि यह कोई नियमित डिग्री नहीं बल्कि एक सम्मानित उपाधि है।
लंबे समय से बिहार की राजनीति में सक्रिय रहे सम्राट चौधरी हमेशा अनुभव को ही ज्यादा महत्व देते रहे हैं। उनका कहना है कि अनुभव ही सबसे बड़ी योग्यता है। पिछले काफी समय से वह बिहार के उप मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। इस दौरान उन्होंने अपने काम से ही अपनी पहचान बनायी।
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कैसा रहा राजनीतिक सफर?
सम्राट चौधरी भले ही शुरुआत से ही बिहार की राजनीति में सक्रिय रहे हो लेकिन वह न तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से निकले हैं और न ही अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत भाजपा से की थी। बल्कि सम्राट चौधरी बिहार ने राजनीति का कखग पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की पाठशाला में सीखा था।
1990 के दशक में सम्राट चौधरी ने राजनीति में कदम रखा और 1999 में वह बिहार में राबड़ी देवी की सरकार में सम्राट चौधरी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सबसे युवा कैबिनेट मंत्री बने थे। हालांकि उम्र को लेकर हुए विवादों में उन्हें इस्तीफा भी देना पड़ा था।
वर्ष 2000 में बिहार विधानसभा चुनाव में सम्राट चौधरी ने राजद की टिकट से परबत्ता सीट से चुनाव लड़ा और जीता। इसके बाद 2010 में भी वह इसी सीट से विधायक चुने गए। हालांकि आपसी मनमुटाव की वजह से 2014 में उन्होंने राजद छोड़कर जदयू का दामन थाम लिया। वहीं जीतनराम मांझी की सरकार में राज्य के मंत्री भी बने लेकिन 2017 में उन्होंने भाजपा का रूख किया। वह बिहार भाजपा के उपाध्यक्ष बने और विधानपरिषद भेजे गए।
2020 में उन्हें NDA की सरकार में राज्य का मंत्री बनाया गया। साल 2023 में वह बिहार भाजपा के अध्यक्ष चुने गए। 2024 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले जदयू-भाजपा की मिलीजुली सरकार बनी जिसमें सम्राट चौधरी को उपमुख्यमंत्री बनाया गया। इस तरह से लालू यादव के साथ शुरू हुआ सम्राट चौधरी का राजनीतिक सफर कई उतार-चढ़ाव के बाद पहले उप मुख्यमंत्री और अब बिहार के मुख्यमंत्री की गद्दी तक पहुंचा।