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Bengal Elections: दमदम सीट पर ब्रात्य बसु की साख दांव पर, मुकाबला बहुकोणीय

शहरी मुद्दों, विकास के दावों और वोटों के बंटवारे के बीच निर्णायक बनती जा रही है यह हाई-प्रोफाइल सीट।

By श्वेता सिंह

Apr 15, 2026 01:16 IST

कोलकाताः कोलकाता के करीब उत्तर 24 परगना की दमदम विधानसभा सीट इस बार पश्चिम बंगाल चुनाव में खास महत्व रखती है। शहरी और औद्योगिक पृष्ठभूमि वाली यह सीट लंबे समय से राजनीतिक रुझानों का संकेत देने वाली मानी जाती है। यहां मध्यमवर्गीय परिवार, छोटे कारोबारी और नौकरीपेशा मतदाता बड़ी संख्या में हैं, जिनका झुकाव चुनावी नतीजों को सीधे प्रभावित करता है।

कभी वामपंथ का गढ़ रही यह सीट 2011 के बाद से तृणमूल कांग्रेस (TMC) का मजबूत आधार बन गई। अब एक बार फिर यह सीट बदलाव और स्थिरता के बीच चुनावी मुकाबले का केंद्र बनी हुई है।

ब्रात्य बसु बनाम बहुकोणीय चुनौती

सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) ने एक बार फिर अपने दिग्गज नेता ब्रात्य बसु (Bratya Basu) को मैदान में उतारा है। 2011 से लगातार जीत दर्ज कर रहे ब्रात्य बसु इस सीट से चौथी बार चुनाव लड़ रहे हैं और विकास कार्यों को अपनी सबसे बड़ी ताकत बता रहे हैं।

लेकिन इस बार उनके सामने सीधा मुकाबला नहीं है। भारतीय जनता पार्टी के अरिजीत बख्शी, माकपा के मयुख विश्वास और कांग्रेस की सुस्मिता विश्वास मैदान में हैं। कई उम्मीदवारों के कारण यह मुकाबला बहुकोणीय हो गया है, जिससे वोटों के बंटने की संभावना बढ़ गई है।

चुनावी मुद्दे और जमीनी हकीकत

दमदम में चुनावी बहस पूरी तरह शहरी समस्याओं पर केंद्रित है। जल निकासी की खराब व्यवस्था और बरसात में जलजमाव, पेयजल की समस्या, ट्रैफिक जाम, सड़कों की स्थिति और रोजगार के सीमित अवसर यहां के प्रमुख मुद्दे हैं।

इसके अलावा 2014 से बंद पड़ी जेसॉप एंड कंपनी फैक्ट्री भी लगातार चर्चा में है, क्योंकि इसके बंद होने से स्थानीय रोजगार प्रभावित हुआ। ब्रात्य बसु जहां अपने कार्यकाल में स्कूलों, पुस्तकालयों और बुनियादी ढांचे में सुधार का दावा कर रहे हैं, वहीं विपक्ष इन दावों को चुनौती देते हुए कह रहा है कि समस्याएं अब भी जस की तस बनी हुई हैं।

आंकड़े, समीकरण और क्या होगा असर?

पिछले चुनावों के आंकड़े दमदम के बदलते राजनीतिक समीकरण को साफ दिखाते हैं। 2016 में ब्रात्य बसु ने वाम उम्मीदवार को करीब 9 हजार वोटों से हराया था, जबकि 2021 में उन्होंने बीजेपी प्रत्याशी पर 26 हजार से ज्यादा वोटों की बढ़त बनाई। इस दौरान बीजेपी का वोट शेयर तेजी से बढ़ा, जिससे मुकाबला पहले से अधिक प्रतिस्पर्धी हो गया। इस बार बहुकोणीय मुकाबले में सबसे बड़ा फैक्टर वोटों का बंटवारा रहेगा। अगर विपक्षी वोट एकजुट होते हैं तो मुकाबला कड़ा हो सकता है, लेकिन बिखराव की स्थिति में सत्तारूढ़ दल को फायदा मिल सकता है।

दमदम में मतदान 29 अप्रैल को दूसरे चरण में होगा और नतीजे 4 मई को सामने आएंगे। यह सीट न सिर्फ स्थानीय बल्कि पूरे शहरी बंगाल की राजनीतिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

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