कोलकाता: पश्चिम बंगाल की सियासत इस बार सिर्फ पार्टियों की लड़ाई नहीं, बल्कि उम्मीदवारों की भारी भीड़ के कारण भी खास बन गई है। चुनाव आयोग (Election Commission of India) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, राज्य की 294 विधानसभा सीटों के लिए कुल 2,926 उम्मीदवार मैदान में हैं-यानी हर सीट पर औसतन 10 से ज्यादा दावेदार।
यह आंकड़ा अपने आप में बताता है कि बंगाल का चुनाव कितना बहुकोणीय और प्रतिस्पर्धी हो चुका है। पहले चरण में 23 अप्रैल को 152 सीटों पर मतदान होगा, जहां 1,478 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं दूसरे चरण में 29 अप्रैल को 142 सीटों पर 1,448 प्रत्याशी किस्मत आजमाएंगे। नतीजे 4 मई को सामने आएंगे।
इस बार चुनावी तस्वीर केवल बड़े दलों तक सीमित नहीं है। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (All India Trinamool Congress) लगातार चौथी बार सत्ता में वापसी के इरादे से उतरी है, जबकि भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) भी पूरे दमखम के साथ सरकार बनाने की कोशिश में है। हालांकि इन दोनों के अलावा कई छोटे दल और निर्दलीय उम्मीदवार भी मुकाबले को और दिलचस्प बना रहे हैं।
चुनाव आयोग ने इस बार मतदाताओं की सुविधा के लिए खास इंतजाम किए हैं। ईवीएम पर उम्मीदवारों की रंगीन तस्वीरें, नाम और चुनाव चिह्न दिखाए जाएंगे ताकि मतदाता आसानी से अपने प्रत्याशी की पहचान कर सकें। इतनी बड़ी संख्या में उम्मीदवारों के बीच यह कदम बेहद अहम माना जा रहा है।
नामांकन की प्रक्रिया भी काफी व्यवस्थित तरीके से पूरी की गई। दूसरे चरण के लिए 9 अप्रैल तक नामांकन दाखिल हुए, 10 अप्रैल को उनकी जांच हुई और 13 अप्रैल तक नाम वापस लेने का मौका दिया गया। इसके बाद ही अंतिम सूची जारी की गई।
बंगाल का यह चुनाव अब केवल राजनीतिक दलों के बीच सत्ता की लड़ाई नहीं रह गया है, बल्कि यह एक ऐसा मैदान बन चुका है जहां हर सीट पर कई चेहरे अपनी पहचान बनाने और जनता का भरोसा जीतने की कोशिश कर रहे हैं। यही वजह है कि इस बार का चुनाव और भी ज्यादा रोचक और अप्रत्याशित माना जा रहा है।