पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण में 10 दिनों से भी कम समय रह गया है। राज्य का सियासी पारा लगातार बढ़ता जा रहा है। राजनीतिक पार्टियां अपनी रणनीतियां को फिर से बना रही हैं, विकास, शासन, कानून, भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर एक-दूसरों पर आरोप-प्रत्यारोप की धार भी तेज हो गयी है।
Ei Samay Online ने झारखंड से भाजपा सांसद निशिकांत दूबे से खास बातचीत की। उन्होंने झारखंड और पश्चिम बंगाल की राजनीति पर अपने विचार रखे। आइए जान लेते हैं उन्हीं की जुबानी कि बंगाल चुनाव को लेकर वह क्या राय रखते हैं -
संसद में किसी भी मुद्दे पर हुई बहस का सारांश बहुत जल्दी निकाल लेते हैं। कैसे?
संसद में मैं समय सबसे ज्यादा देता हूं। संसद के खुलने के समय ही मैं वहां पहुंचता हूं और जब बंद होती है तभी मैं वहां से निकलता हूं। मैं वहां भाषण देने के लिए नहीं बैठता हूं। ज्यादातर जो लोग खुद को सीनियर नेता समझते हैं, वे खुद तो भाषण देते हैं लेकिन दूसरों को नहीं सुनते हैं। मैं सुबह से शाम तक लोगों को सुनने की कोशिश करता हूं।
मुझे बचपन से ही पढ़ने की आदत है। ऐसा कोई भी दिन नहीं है जब रात को सोने से पहले तक मैंने कम से कम 2 से ढ़ाई घंटे पढ़ने के लिए न निकाला हो। यहीं वजह से सारांश निकल जाता है और जब लोग किसी बिल, कानून इत्यादि का मतलब या आगे क्या होना चाहिए, इस तरह के सवाल पूछते हैं तो उन्हें उनका जवाब मिल जाता है।
संसद में प. बंगाल में घुसपैठ के मुद्दे पर आपने ही सबसे ज्यादा सवाल उठाए हैं। क्यों ऐसा लगता है कि बंगाल से ही घुसपैठ हो रहा है?
मैं पहली बार सांसद साल 2009 में चुना गया था। 2009 से ही अगर मैंने लगातार किसी मुद्दे पर सवाल उठाया है तो वह घुसपैठ ही है। जिस जगह से मैं सांसद चुना गया हूं, वहां साल 1951 में आदिवासियों की आबादी 45% था। 2011 की जनगणना के मुताबिक वहां आदिवासियों की जनसंख्या घटकर केवल 26% रह गयी है जो इस बार की जनगणना में और भी कम हो जाएगी।
यह मैं नहीं बल्कि वहां की राज्य सरकार और कोर्ट ने हलफनामा दिया है। मुसलमानों की जनसंख्या जहां 9% थी अब वहां लगभग 25% हो गयी है। पूरे देश में मुस्लिमों की संख्या जहां सिर्फ 4% बढ़ा है लेकिन हमारे यहां 15% से 16% बढ़ा है। विस्थापन है, पलायन है, रोजगार नहीं है, पीने का पानी नहीं है। ऐसी कौन सी वजह है कि उनकी संख्या बढ़ रही है?
एक और वजह है, जिसके कारण मैंने इस मुद्दे को उठाया वह है कि 2008 में लगभग पूरे देश में Delimitation (सीमांकन) हुआ। जम्मु-कश्मीर में आर्टिकल 370 के बाद हुआ और असम जो रुका हुआ था वहां भी हो गया। सिर्फ झारखंड ऐसा राज्य है जहां आज तक Delimitation नहीं हुआ। कारण? कारण यह है कि यदि 2008 में वर्ष 2001 की जनगणना के आधार पर Delimitation होता तो लोकसभा में 1 और विधानसभा में आदिवासियों की 3 सीटें कट जाती। पूरा देश आदिवासियों की बात करता है लेकिन यहां किसी का ध्यान नहीं जाता है। इसी वजह से मैंने यह मुद्दा उठाया।
रहा सवाल पश्चिम बंगाल का तो हमारी बांग्लादेश के साथ जो सीमा है, उसका ज्यादा हिस्सा बंगाल से ही जुड़ा हुआ है। बड़ी ही विकट परिस्थिति में हमारा बंटवारा हुआ था। 1947 में हमारी पार्टी के नेता श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने इस बंटवारे का काफी विरोध भी किया था। राज्य सरकार हमारी मदद ही नहीं करना चाह रही है। कांटेदार तार की जो बाड़ हम लगाना चाह रहे हैं, उसके लिए जमीन ही नहीं दे रही है। दूसरा पहाड़ और नदी है, जहां पहरेदारी बिठाना भी मुश्किल है।
2001 की जनगणना के मुताबिक हमारे जिला पाकुड़ में मुस्लिमों की आबादी 35% थी लेकिन आज वहां मुस्लिमों की आबादी 65% है। बंगाल में मालदह, मुर्शिदाबाद, बीरभूम, दक्षिण 24 परगना को देखते हैं तो पता चलता है कि यहां घुसपैठ कैसे होता है और उसमें बंगाल कैसे प्रभावी है यह मैंने अपनी आंखों से देखा है। मेरी मौसी महिशादल की रानी हुआ करती थी। इसलिए मेरा बचपन कोलकाता और महिषादल में ही बिता है। इसी वजह से यह मुद्दा मेरे दिल के बहुत करीब है।
क्या भाजपा को बंगाल में मुस्लिम वोट मिलेगा?
यह देश जिन मुस्लिमों का है, राष्ट्रीयता के आधार पर वे भाजपा को ही वोट करेंगे। हमारी उनसे तो यहीं अपेक्षा है। हमारा विरोध पाकिस्तानी और बांग्लादेशी मुस्लिमों से है। 1950 का नेहरु-लियाकत पैक्ट जो है, जिसके आधार पर 15 अप्रैल 1950 को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने मंत्रिमंडल से इस्तीफा दिया था। उन्होंने कहा था कि असम, त्रिपुरा और बंगाल में 16 किलोमीटर तक आपने फ्री-फ्लो दे दिया है। कोई भी आराम से आवाजाही कर सकता है।
हम धर्मनिरपेक्ष देश होंगे वे इस्लामिक देश होंगे। यह गलत है। उनकी बात को दरकिनार किया गया। धीरे-धीरे यहां मुस्लिम आबादी बढ़ने लगी। वो रोजगार खा रहे हैं। वो अगर हिंदुओं का रोजगार खा रहे हैं तो यहां के मुसलमानों का भी खा रहे हैं। हमारा विरोध उनके (पाकिस्तानी-बांग्लादेशी मुस्लिमों) साथ है। हमारा विरोध यहां के नागरिकों के साथ नहीं है। इसलिए हमें अपेक्षा है कि वो वोट करेंगे। यह देश हिंदू-मुस्लिम-सिख-ईसाई सबका है।
कोलकाता भारत की सांस्कृतिक राजधानी है। फिर क्यों कह रहे हैं कि 'सोनार बांग्ला' बनाएंगे? यह तो पहले से ही है।
बिहार, बंगाल, ओडिशा एक ही था जिसमें बांग्लादेश भी शामिल था। हम 'सोनार बांग्ला' बनाने की बात करते हैं, तब मैं व्यक्तिगत तौर पर बहुत ही भावुक हूं। चैतन्य महाप्रभु, जिन्होंने भक्ति पुनर्जागरण किया, उन्हें गुरु बिहार में मिला था। क्या सीपीएम अथवा ममता जी की सरकार ने कभी उनके गुरु को ढूंढने की कोशिश की? 1906 के सूरत अधिवेशन में महर्षि अरविंद गरम दल के अध्यक्ष बनें थे। उन्होंने 1907-08 बम विस्फोट भी किया था और जिस जगह पर किया था वह जगह देवघर है जहां से मैं सांसद हूं।
क्या किसी सरकार ने उस जगह को ढूंढने की कोशिश की? जगदीश चंद्र बोस, ईश्वर चंद्र विद्यासागर के जीवन के आखिरी 20 साल मेरे यहां (वर्तमान झारखंड) में ही रहे। क्या उन्हें ढूंढने की कोशिश की? 100 साल से ज्यादा समय पहले स्वामी विवेकानंद जी ने रामकृष्ण मिशन का पहला स्कूल देवघर में ही खोला था। किस बंगाली धरोहर की बात कर रहे हैं। हम तो उसके ही पुनरुद्धार की बात कर रहे हैं। आपने उनके लिए कुछ नहीं किया। इसलिए हम बंगाली संस्कृति और गौरव की बात करते हैं और उसे भाजपा वापस लाएगी।
क्या बंगाल का आम बंगाली भाजपा को वोट देगा?
क्यों नहीं देगा? भारतीय जनता पार्टी तो बनी ही एक बंगाली के कारण है। आज अगर भाजपा की राष्ट्रीयता है, मोदी जी देश के प्रधानमंत्री हैं, तो इस आदर्श को बनाने के लिए डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने कुर्बानी दी थी। उन्होंने मंत्रिमंडल का त्याग किया था। हमारा एक नारा था, 'जहां हुए बलिदान मुखर्जी, वह कश्मीर हमारा है।' 2019 में जब जनता ने हमें मौका दिया तो हमने डॉ. मुखर्जी का जनता से किया हुआ जो वादा था, उसे पूरा किया। मुझे लगता है कि आज बंगाली भद्रलोग, जनमानस वह बंगाली के गौरव के लिए फिर से श्यामा प्रसाद मुखर्जी को याद करेंगे और भाजपा को वोट देंगे।
तीन प्रमुख चुनावी मुद्दे क्या होंगे?
सबसे बड़ा मुद्दा तो कानून-व्यवस्था होगी। हमें ऐसा बंगाल बनाना है जहां समाज पूरी तरह से आजाद हो। कोई गुंडा-बदमाश की जगह न हो, अमीर-गरीब, महिला-पुरुष में भेदभाव न हो। जाति के नाम पर वोट नहीं...। भ्रष्टाचार, कटमनी, बांग्लादेशी घुसपैठ, जमीन पर कब्जा, बहू-बेटियों की सुरक्षा इसे बनाना है। 1911 तक बंगाल जो देश की राजधानी था, आज भी कोलकाता से ज्यादा खूबसूरत शहर पूरी दुनिया में नहीं है।
अगर बाबू घाट से डायमंड हार्बर तक पूरा रिवरफ्रंट बना दिया जाए तो पूरी दुनिया के लोग यहां आएंगे। उन सभी का विकास करना है। मुंबई जो हमारी वित्तीय राजधानी बन गया है ज्यादातर लोग तो यहीं रहती थे - डालमिया जी, बिड़ला जी, लक्ष्मी मित्तल जी सभी यहीं रहते थे। उन सभी को वापस लाना है।
क्यों राज्य सरकार बार-बार आवंटन रोकने का आरोप केंद्र सरकार पर लगाती है?
यह रुपया गरीबों की खून-पसीने की कमाई है। हम-आप जो टैक्स देते हैं उससे ही कल्याणकारी योजना लाती है। सरकार के पास नोट छापने की कोई मशीन तो नहीं है। प्रधानमंत्री कहते हैं कि न खाएंगे और न खाने देंगे। इनके मंत्रियों के यहां से करोड़ों रुपया मिलता है। सीपीएम और भाजपा जिनका आदर्श पूरी तरह से अलग है लेकिन जो उनके मंत्री वे हॉस्टल में रहते थे।
आज इनके मंत्री कितने आलीशान बंगलों में रहते हैं और आप चाहते हैं कि केंद्र का रुपया भी अपने पॉकेट में भर ले? क्या हमने तमिलनाडु, हिमाचल, तेलंगाना, कर्नाटक को रुपया नहीं दिया! आप यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट दीजिए। उसकी जांच होगी। सभी राज्यों को रुपया दिया जा रहा है लेकिन आपको क्यों नहीं? क्योंकि इनके मंत्री इतने भ्रष्ट हैं। हमारी सरकार जब आएगी तब देखिएगा कि रुपयों का भंडार आएगा।
PM मोदी हो या CM ममता बनर्जी, हर कोई कह रहा है कि 294 सीट पर 'मैं ही हूं उम्मीदवार'। अगर भाजपा सत्ता में आती है तो कौन मुख्यमंत्री बनेगा?
पार्टी और पार्टी के विधायक तय करेंगे। हमारी पार्टी में कोई भी मुख्यमंत्री बन सकता है। अनुसूचित जाति-जनजाति, कोई आम कार्यकर्ता भी मुख्यमंत्री बन सकता है। हमारा नेतृत्व स्पष्ट है - मोदी जी हमारे नेता है। कोलकाता के गौरव को अगर लौटाना है तो भाजपा का नेतृत्व ही उसे लौटा सकता है।
कितनी सीट भाजपा को मिलेगी?
200 सीटें। शत-प्रतिशत! इस बार कहीं कोई मुकाबला ही नहीं। इस बार मैं वहीं स्थिति देख पा रहा हूं, जब 2011 में सीपीएम के खिलाफ और तृणमूल के पक्ष में लोग खड़े थे। आज टीएमसी के खिलाफ लोग भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में हैं।