कोलकाताः दक्षिण कोलकाता की बालीगंज विधानसभा सीट इस बार पश्चिम बंगाल की राजनीति का सबसे चर्चित रणक्षेत्र बन गई है। पूरी तरह शहरी और उच्चवर्गीय मानी जाने वाली यह सीट करीब 2 लाख की आबादी का प्रतिनिधित्व करती है। यहां शिक्षित, पेशेवर और जागरूक मतदाता बड़ी संख्या में हैं, जबकि मुस्लिम समुदाय का प्रभाव भी चुनावी समीकरण को खास बनाता है।
बालीगंज सिर्फ एक विधानसभा सीट नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतिष्ठा का प्रतीक है। यहां जीत हासिल करना किसी भी दल के लिए कोलकाता में अपनी पकड़ मजबूत करने जैसा माना जाता है। यही कारण है कि इस बार यहां मुकाबला बेहद कड़ा और दिलचस्प हो गया है।
TMC की रणनीति और नेतृत्व का अनुभव
तृणमूल कांग्रेस ने इस हाई-प्रोफाइल सीट पर अपने अनुभवी नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय (Sovandeb Chattopadhyay) को उतारकर साफ कर दिया है कि वह कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं है।
इस सीट पर लंबे समय तक सुब्रत मुखर्जी (Subrata Mukherjee) का दबदबा रहा, जिन्होंने 2011, 2016 और 2021 में लगातार जीत दर्ज की थी। उनके निधन के बाद 2022 के उपचुनाव में बाबुल सुप्रियो (Babul Supriyo) ने जीत हासिल की और पार्टी की पकड़ बनाए रखी।
अब तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने एक बार फिर बदलाव करते हुए अनुभवी नेतृत्व को आगे किया है। यह फैसला बताता है कि पार्टी इस सीट को अपने नियंत्रण में बनाए रखने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है।
BJP का नया दांव और वाम की मौजूदगी
भारतीय जनता पार्टी ने इस बार डॉ. शतरूपा को मैदान में उतारा है, जो एक नया चेहरा हैं। भाजपा (BJP) को उम्मीद है कि उनका प्रोफाइल शहरी और शिक्षित मतदाताओं को आकर्षित करेगा और पार्टी को इस प्रतिष्ठित सीट पर मजबूत चुनौती देने का मौका देगा।
वहीं, वाम दल भी इस मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की स्थिति में हैं। 2022 के उपचुनाव में CPI(M) की उम्मीदवार सायरा शाह हालिम (Saira Shah Halim) को लगभग 30 प्रतिशत वोट मिले थे। इससे साफ है कि वाम का आधार अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अगर यह वोट बरकरार रहता है, तो चुनाव और ज्यादा रोमांचक हो सकता है।
बालीगंज का चुनावी गणित और अहम मुद्दे
इस बार चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण ने माहौल को और गर्म कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार 23,968 मतदाताओं में से 6,174 को अयोग्य पाया गया है। इस मुद्दे को लेकर टीएमसी (TMC) और भाजपा (BJP) के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं, जो चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं।
पिछले चुनावी आंकड़े भी इस सीट की अहमियत को दर्शाते हैं। 2016 में जीत का अंतर 15,225 वोट था, जो 2021 में बढ़कर 75,359 हो गया। वहीं 2022 के उपचुनाव में टीएमसी ने 20,228 वोटों से जीत हासिल की थी।
राज्य की राजनीति के लिहाज से भी यह सीट बेहद अहम है। 2021 में टीएमसी ने 213 सीटों के साथ बड़ी जीत दर्ज की थी, जबकि बीजेपी 77 सीटों के साथ मजबूत विपक्ष बनी थी। ऐसे में बालीगंज का नतीजा यह संकेत देगा कि शहरी बंगाल में किसकी पकड़ मजबूत हो रही है।
मतदान 23 और 29 अप्रैल को होगा और 4 मई को नतीजे सामने आएंगे। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या तृणमूल कांग्रेस अपनी पकड़ बनाए रखेगी, भाजपा नया इतिहास रचेगी या फिर वाम दल कोई बड़ा उलटफेर करेंगे।