कोलकाताः पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव के बीच चुनाव आयोग (Election Commission of India) ने लोकतंत्र को और अधिक संवेदनशील और समावेशी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। अब ऐसे बुजुर्ग और दिव्यांग मतदाता, जो शारीरिक कारणों से मतदान केंद्र तक नहीं पहुंच पाते, वे अपने घर से ही मतदान कर सकेंगे। आयोग ने 15 अप्रैल को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी साझा करते हुए इस पहल को “डेमोक्रेसी डिलीवर्ड टू द डोरस्टेप” बताया। संदेश साफ है-लोकतंत्र केवल मतदान केंद्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हर उस नागरिक तक पहुंचना चाहिए, जो अपने अधिकार का प्रयोग करना चाहता है।
झारग्राम जिले में इस सुविधा की शुरुआत हो चुकी है। यहां चुनाव अधिकारी स्वयं मतदाताओं के घर जाकर पूरी मतदान प्रक्रिया संपन्न करा रहे हैं। यह पहल केवल सुविधा नहीं, बल्कि उन लोगों के प्रति सम्मान का प्रतीक है, जिन्होंने उम्र या शारीरिक चुनौतियों के बावजूद लोकतंत्र में अपनी आस्था बनाए रखी है।
कई बुजुर्गों के लिए मतदान केंद्र तक जाना कठिन होता है। लंबी कतारें, भीड़ और दूरी उनके उत्साह को सीमित कर देती हैं। ऐसे में घर पर ही मतदान की व्यवस्था उन्हें न केवल राहत देती है, बल्कि यह भरोसा भी दिलाती है कि उनका वोट उतना ही महत्वपूर्ण है जितना किसी और का। इसी तरह, दिव्यांग मतदाताओं के लिए भी यह कदम आत्मसम्मान से जुड़ा हुआ है। अब उन्हें दूसरों पर निर्भर हुए बिना, अपने अधिकार का इस्तेमाल करने का अवसर मिल रहा है।
पश्चिम बंगाल में चुनाव दो चरणों में होने हैं-23 अप्रैल और 29 अप्रैल को मतदान होगा, जबकि 4 मई को मतगणना की जाएगी। इस बार कुल 2,926 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं, जिनमें पहले चरण में 1,478 और दूसरे चरण में 1,448 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।