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इस्लामाबाद में फिर हो सकती है ईरान-अमेरिका वार्ता, अभी अंतिम फैसला बाकी

अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर सकते हैं JD Vance, परमाणु मुद्दे पर मतभेद बरकरार, लेकिन कूटनीतिक प्रयास जारी।

By श्वेता सिंह

Apr 15, 2026 08:16 IST

वॉशिंगटनः वाशिंगटन में ईरान (Iran) और अमेरिका (United States) के बीच संभावित दूसरे दौर की बातचीत को लेकर कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस वार्ता का अगला दौर फिर से पाकिस्तान (Pakistan) की राजधानी इस्लामाबाद में आयोजित किए जाने की संभावना है। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) के इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने की संभावना जताई जा रही है। उनके साथ अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ (Steve Witkoff) और पूर्व वरिष्ठ सलाहकार जेरेड कुश्नर (Jared Kushner) के भी शामिल होने की चर्चा है।

सूत्रों के अनुसार, हाल ही में हुई 21 घंटे लंबी बातचीत के बाद अमेरिकी प्रशासन ने अपने शीर्ष सलाहकारों को कूटनीतिक समाधान तलाशने की जिम्मेदारी दी है। हालांकि, दूसरे दौर की बातचीत को लेकर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। एक अमेरिकी अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि भविष्य की वार्ता पर चर्चा जारी है, लेकिन अभी कुछ तय नहीं हुआ है। इस बीच, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में पाकिस्तान में वार्ता आगे बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि बातचीत की प्रक्रिया धीमी है, लेकिन प्रगति की संभावना बनी हुई है।

ट्रंप ने यह भी कहा कि वार्ता का अगला चरण यूरोप में भी हो सकता है, हालांकि बाद में उन्होंने इस्लामाबाद को अधिक संभावित स्थान बताया। उन्होंने पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर (Asim Munir) की भूमिका की सराहना भी की। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि वह स्वयं इन वार्ताओं में शामिल नहीं होंगे और अमेरिकी पक्ष से प्रतिनिधित्व कौन करेगा, यह अभी तय नहीं है।

परमाणु मुद्दे पर दोनों देशों के बीच मतभेद बने हुए हैं। ट्रंप ने कहा कि ईरान (Iran) को परमाणु हथियार (Nuclear Weapons) रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती और लंबे समय तक यूरेनियम संवर्धन रोकने के प्रस्ताव से उन्होंने असहमति जताई। पाकिस्तानी सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल मुहम्मद सईद ने कहा कि ईरान ने यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) के मुद्दे पर कुछ लचीलापन दिखाया है। वहीं ईरानी विश्लेषक मोहम्मद मरांदी ने कहा कि दबाव से ईरान (Iran) अपना रुख नहीं बदलेगा और संवर्धन समाप्त करना स्वीकार्य नहीं होगा।

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